Information about yoga


                        योगासनों से परिचय´


योगशास्त्रों में योगासनों की संख्या का वर्णन करते हुए कहा गया है कि योगासन की संख्या इस संसार में मौजूद जीवों की संख्या के बराबर है। भगवान शिव द्वारा रचना किए गए आसनों की संख्या लगभग 84 लाख है। परंतु इन आसनों में से केवल महत्वपूर्ण 84 आसन ही सभी जानते हैं। हठयोग में केवल 84 आसनों को बताया गया है, जो मुख्य है तथा अन्य आसनों को इन्ही 84 आसनों के अन्तर्गत सम्माहित है। इन आसनों में 4 आसन मुख्य है-

■ समासन
■ पदमासन
■ सिद्धासन
■ स्तिकासन

बाकी अन्य दूसरे आसन व्यायामात्मक है। प्रत्येक आसन को अलग-अलग तरह से किया जाता है और इन आसनों के अभ्यास से अलग-अलग लाभ मिलते हैं। आसनों का प्रयोग केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी भी करते हैं। इन आसनों के अभ्यास से सभी को लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए- जब बिल्ली सोकर उठती है, तो सबसे पहले चारों पैरो पर खड़े होकर पेट के भाग को ऊंचा करके अपनी पीठ को खींचती है। इस प्रकार से बिल्लियों द्वारा की जाने वाली यह क्रिया एक प्रकार का आसन ही है। इस तरह से कुत्ता भी जब अपने अगले व पिछले पैरों को फैलाकर पूरे शरीर को खींचता है तो यह भी एक प्रकार का आसन ही है। इससे सुस्ती दूर होती है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है। इस तरह से सभी पशु-पक्षी किसी न किसी रूप में आसन को करके ही स्वस्थ रहते हैं। योगशास्त्रों के बारे में लिखने व पढ़ने वाले अधिकांश योगी पशु-पक्षी आदि से प्रेरित थे। क्योंकि आसनों में अधिकांश आसनों के नाम किसी न किसी पशु या पक्षी के नाम से रखा गए है, जैसे- शलभासन. सर्पासन, मत्स्यासन, मयूरासन, वक्रासन, वृश्चिकासन, हनुमानासन, गरूड़ासन, सिंहासन आदि।

योगासन योगाभ्यास की प्रथम सीढ़ी है। यह शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक करते हैं तथा शरीर को शक्तिशाली बनाकर रोग को दूर करते हैं। इसलिए योगासन का अभ्यास है, जिससे शरीर पुष्ट तथा रोग रहता है। योगासनों का अभ्यास बच्चे, बूढ़े, स्त्री-पुरुष सभी कर सकते हैं।

योगासन का अभ्यास करने से पहले इसके बारे में बताएं गए आवश्यक निर्देश का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर निर्देशों का पालन करें। षटकर्मों द्वारा शरीर की शुद्धि करने के बाद योगासन का अभ्यास करना विशेष लाभकारी है। यदि षटकर्म करना सम्भव न हो तो षटकर्म क्रिया के अभ्यास के बिना ही इन आसनों का अभ्यास करना लाभदायक है।

कुछ आसनों के साथ प्राणायाम, बन्ध, मुद्रा आदि क्रिया भी की जाती है। योगासनों के अभ्यास के प्रारंभ में उन आसनों का अभ्यास करना चाहिए, जो आसन आसानी से किये जा सकें। इन आसनों में सफलता प्राप्त करने के बाद ही कठिन आसन का अभ्यास करें। किसी भी योगासन को करना कठिन नहीं है। शुरू-शुरू में कठिन आसनों को करने में कठिनाई होती है, परंतु प्रतिदिन इसका अभ्यास करने से यह आसान हो जाता है।

                   योगासन से रोगों का उपचार

विभिन्न रोगों को दूर करने में `योग´ अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। प्राचीन काल से ही योग हमारी संस्कृति का महत्त्वपूर्ण अंग रहा है। `योग´ शब्द की उत्पत्ति युज धातु से हुई है, जिसका अर्थ जोड़ना, सम्मिलित होना तथा एक होना होता है। ´भगवत गीता´ के अनुसार `समत्व योग उच्यते´ अर्थात जीवन में समता धारण करना योग कहलाता है। योग कर्मसु कौशलम अर्थात कार्यो को कुशलता से सम्पादित करना ही योग है। महर्षि पतंजलि रचित योगसूत्र में सबसे पहले `अष्टांग योग´ की जानकारी मिलती है, जिसका अर्थ है आठ भागों वाला। इस योग के अनुसार `योगिश्चत्तवृत्ति निरोध´ अर्थात मन की चंचलता को रोकना योग माना जाता है।

                   रोगों में योगासन का उपयोग

अनेक प्रकार के रोग-विकार आज की जीवन की सामान्य स्थिति है। समय-असमय, जाने-अंजाने में न खाने योग्य पदार्थों का भी सेवन करना हमारी आदत बन गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को खराब करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आज के समय में इनसे छुटकारा पाने का एक ही उपाय हैं- योगासन। योगाभ्यास करने वाले व्यक्ति अपने आहार तथा खान-पान पर विशेष ध्यान देते हैं।

आयुर्वेद और योगासन दोनों के बीच घनिष्ठ सम्बंध है। आयुर्वेद में भोजन और परहेज का पालन करते हुए योगासन का अभ्यास करने से अनेक प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। योगासन के निरंतर अभ्यास से पहले मनुष्य को शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है और शरीर में उत्पन्न रोगों को दूर करता है। योगासन से शरीर के मुख्य अंग स्वस्थ होते हैं, जैसे- पाचनतंत्र, स्नायुतंत्र, श्वासन तंत्र, रक्त को विभिन्न अंगो में पहुंचाने वाली तंत्र आदि प्रभावित होते हैं। योगासन के अभ्यास से शरीर के सभी अंग स्वस्थ होकर सुचारू ढंग से कार्यो को करने लगते हैं।

           योगासन द्वारा रोगों को दूर करना

योगशास्त्र में विभिन्न रोगों के विकारों को खत्म करने तथा स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए अनेक योगासनों को बताया गया है। जिन अंगों में कोई खराबी होती है, उस रोग से संबन्धित योगासन के निरंतर अभ्यास से रोग दूर हो जाते हैं। योगासनों द्वारा रोगो को खत्म कर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। यदि योगासनो के अभ्यास के नियमो का पालन करें और खान-पान व परहेजों का पालन कर आसनों का अभ्यास का पालन करें तो विभिन्न प्रकार के रोग दूर होकर शारीरिक स्वास्थ्यता बनी रह सकती है।

Tips for wrinkles

           झुर्रियों से बचाव वा उसका उपचार



झुर्रियां अकसर बढ़ती उम्र में सभी में होती है। विशेषकर ज्यादा गर्मी या ज्यादा सर्दी के दौरान चेहरे पर झुर्रियां यानी बूढी रेखाओं के पड़ने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.लेकिन आज की जीवनशैली में लगातार बदलाव होने के कारण अब असमय भी झुर्रियां होने लगी हैं।

आइए जानें झुरिर्यों से बचाव के घरेलू उपचार जो आपके लिए बहुत ही लाभदायक हो सकते हैं।

* अंडे के सफेद हिस्से से झुर्रियों वाले हिस्से पर मालिश करने से आप जल्दी ही इस परेशानी पर विजय प्राप्त कर लेंगे।

* गुलाबजल को फ्रीजर में जमाकर इसे नियमित रूप से झुर्रियों वाली जगह पर मलें। त्वचा टाइट रहेगी ।

* गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी तरह धोएं फिर उसे खुरदरे तौलिए से रगड-रगड़ कर सुखा लें। आधा चम्मच दुध की ठंडी मलाई में नींबु के रस की चार पाँच बूंदें मिलाकर झुर्रियाँ तब तक मलते रहें जब तक कि मलाई घुलकर त्वचा में समा न जाए।आधा घण्टे बाद पानी से धो डालें परन्तु साबुन का प्रयोग न करें। एक माह तक नियमित इस प्रयोग से झुर्रियाँ दुर होती हैं

* खीरे के रस या फिर खीरे के छोटे-छोटे पीस काटकर झुर्रियों वाली जगह पर लगाकर उसकी मसाज करें।

* हल्दी या चंदन का लेप लगाने से भी झुर्रियों में लाभ मिलता हैं।

* जब झुर्रियां पडती हैं तो त्‍वचा पर गहरे रंग के धब्‍बे दिखाई देने लगते हैं। इसका मतलब कि मृत कोशिकाएं चेहरे को बूढा बना रहीं हैं। इसको दूर करने के लिए चेहरे पर स्‍क्रबिंग करनी चाहिए जिससे डेड सेल्‍स हट जाएं और नई त्‍वचा सामने आ जाए।

* पके हुए पपीते का एक टुकडा काटकर चेहरे पर घिसें या मसलकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें। ऐसा लगातार करने से चेहरे की झुर्रियाँ दूर होती हैं,व चेहरे की रंगत भी निखरती है।

* त्वचा की झुर्रियाँ मिटाने के लिए आधा गिलास गाजर का रस नित्य खाली पेट कम से कम 15 दिन तक लें।

* चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने और युवा बनाये रखने के लिए अंकुरित चने व मूंग को सुबह शाम अवश्य ही खाएँ।

* सर्दियों में तेल से मसाज कर करके गरम पानी से नहाएं और नहाने के बाद क्रीम से भी मसाज करें। इससे त्‍वचा टाइट रहेगी और रुखी भी नहीं होगी।

* विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार जैसे की मछली आदि में होते है उसका ज्यादा से ज्यादा सेवन करें इससे त्वचा जवाँ बनी रहती है।

* चेहरे पर कॉफी पाउडर का लेप लगाने से कॉफी पाउडर में मौजूद कैफीन की वजह से चेहरे की झुर्रियां बहुत तेजी से खत्म होती है ।

* झुर्रियों के सफल उपचार के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है, दिन में कम से 14 -15 गिलास पानी चाहिए ।

* सुंदर,गोरी और टाइट त्वचा के लिए सप्ताह में 1-2 बार चंदन फेस पैक लगाना चाहिए । चंदन पाउडर का पैक चेहरे पर पड़े गहरे दाग धब्बे , झाइयां और झुर्रियों को जल्दी दूर करता है।

* हर रात को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें, इससे चेहरे के डार्क सर्किल और आंखें सूजी हुई नजर नहीं आएंगी। कभी भी तकिये में मुंह छिपा कर भी नहीं सोएं क्योंकि इससे भी चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।

* हमारी त्वचा पर तेज धूप का बहुत कुप्रभाव पड़ता है। इसलिए धूप में निकलने से पहले त्वचा पर ऐसा सनस्क्रीन, जिसमें जिंक ऑक्साइड हो जरूर लगाएं।

* एलोवेरा एवं शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर हैं। त्वचा में नमी का स्तर बढ़ाने के लिए इन्हे प्रतिदिन आजमाएं इनसे भी झुर्रियां कम होंगी। * उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कोलाजिन बनाना बंद हो जाता है, जिससे त्वचा में लचीलापन कम हो जाता है। इस बचने के लिए नमी वाला साबुन और क्रीम का रोज़ इस्तमाल करें। नित्य विटामिन सी युक्त क्रीम प्रयोग करें और ज्यादातर समय धूप से दूर रहें।

* अपनी त्वचा को झुर्रियों से बचाने के लिए हमें नियमित रूप से ताजे फलों जैसे आम, जामुन, संतरा, मौसम्मी, लीची, सेव, अंगूर, नाशपाती, पपीता, अनार और हरी सब्जियों पालक, बंदगोभी और दिन में कम से कम एक बार सलाद का सेवन करना चाहिए । इनमें ढेर सारे विटामिन्स एवं खनिज मसलन आयरन, विटामिन सी, विटामिन बी, फाइबर इत्यादि होते हैं । जो अत्यंत हीं लाभकारी होते हैं तथा हमारी त्वचा को जवान एवं खुबसूरत बनाये रखते हैं ।

* नियमित व्यायाम करना बहुत जरुरी है। व्यायाम करने से हमारी हर कोशिका को ओक्सिजन एवं रक्त प्राप्त होता है जिससे आपकी त्वचा जवान रहती है तथा झुर्रियां भी दूर रहती है ।

* पेट साफ रखने और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर कर भी आप चेहरे पर झुर्रियां पड़ने से रोक सकते हैं।

* तनाव से यथासंभव बचे । तनाव से हमारे शरीर में एक रसायन कोरटीसोल का स्राव होता है जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है जिससे झुर्रियां शीघ्र पड़ती है ।

* गुस्सा करने से बचे । गुस्सा करने अथवा तरह तरह से मुंह बनाने से भी चेहरे पर उम्र के पहले हीं झुर्रियां पड़ जाती हैं।

* सिगरेट और शराब दोनों की ही वजह से झुर्रियों बहुत तेजी से पड़ती है । स्मोकिंग से हमारे होठों का रंग काला पड़ जाता है और चेहरे की त्वचा का कोलाजिन भी नष्ट होता है, जिससे चेहरे पर तेजी से झुर्रियां पड़ने लगती हैं।

Some important tips for take food.

                याद रखने योग्य बातें



भोजन करने से पहले और बाद में याद रखने योग्य आवश्यक नियम

जब हम भोजन करते हैं तो हमें भोजन से पूर्व और भोजन के बाद बहुत-सी बातों का ध्यान रखना चाहिए। इससे हम अपने स्वास्थ्य को ठीक रख सकते हैं। भोजन करने से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नानुसार हैं-

* प्रातः बिना स्नान किए भोजन नहीं करना चाहिए।

* भोजन करने से पहले हाथ, मुँह और पैरों को ठंडे पानी से धोना चाहिए। ऐसा करने से अनेक लाभ होते हैं।

* भोजन करने से पूर्व ईश्वर का स्मरण करना चाहिए और यह प्रार्थना करना चाहिए कि हम जो भो
जन करने जा रहे हैं, वह हमारे स्वास्थ्य के लिए हितकर हो।

* भोजन को धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए।

* भोजन को कभी भी ठूँस-ठूँसकर नहीं खाना चाहिए। इससे कई रोग हो सकते हैं। भोजन भरपेट से तीन चौथाई ही करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ्य रहने का सर्वोत्तम उपाय यह है कि भूख से कम भोजन किया जाए।

* भूख लगने पर पानी पीना और प्यास लगने पर भोजन नहीं करना चाहिए, अन्यथा स्वास्थ्य को हानि पहुँचती है।

* भोजन के बीच में प्यास लगने पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना चाहिए। भोजन के अंत में तुरंत पानी नहीं पीना चाहिए। भोजन के एक घंटे बाद खूब पानी पीना चाहिए।

* बासी, ठंडा, कच्चा अथवा जला हुआ और दोबारा गर्म किया हुआ भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

* भोजन पच जाने पर ही दूसरी बार भोजन करना चाहिए। प्रातः भोजन के बाद यदि शाम को अजीर्ण मालूम हो, तो उस समय कुछ नर्म भोजन लिया जा सकता है। परंतु रात्रि के भोजन के बाद प्रातः अजीर्ण हो तो बिल्कुल भी भोजन नहीं करना चाहिए।

* दोपहर को भोजन करने के बाद थोड़ा विश्राम करना लाभदायक होता है और रात्रि के भोजन के बाद थोड़ा टहलना हितकर होता है।

* भोजन करने के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए। चाहे वह दोपहर का भोजन हो या रात्रि का। भोजन व रात्रि के सोने में कम से कम दो घंटे का अंतर होना चाहिए।

* सर्दी के दिनों में भोजन से पूर्व थोड़ा-सा अदरक व सेंधा नमक खाना चाहिए। इससे पाचन शक्ति बढ़ जाती है।

* भोजन सामग्री में कड़े पदार्थ सबसे पहले, नर्म पदार्थ बीच में और पतले पदार्थ अंत में खाने चाहिए।

* भोजन में दूध, दही एवं छाछ का प्रयोग लाभप्रद होता है। इस सबका सेवन दीर्घजीवी एवं स्वस्थ बनाता है।

* इस बात को हमेशा याद रखें कि भोजन करने के बाद क्रोध नहीं करना चाहिए और न ही भोजन के तुरंत बाद व्यायाम करना चाहिए, इससे स्वास्थ्य को नुकसान होता है।

* रात्रि के भोजन के बाद दूध पीना हितकर है। रात्रि में दूध का सेवन अमृततुल्य माना गया

Benefits of papaya

                             पपीता


पपीता एक ऐसा मधुर फल है जो सस्ता एवं सर्वत्र सुलभ है। यह फल प्राय: बारहों मास पाया जाता है। किन्तु फरवरी से मार्च तथा मई से अक्तूबर के बीच का समय पपीते की ऋतु मानी जाती है। कच्चे पपीते में विटामिन ‘ए’ तथा पके पपीते में विटामिन ‘सी’ की मात्रा भरपूर पायी जाती है।

आयुर्वेद में पपीता (पपाया) को अनेक असाध्य रोगों को दूर करने वाला बताया गया है। संग्रहणी, आमाजीर्ण, मन्दाग्नि, पाण्डुरोग (पीलिया), प्लीहा वृध्दि, बन्ध्यत्व को दूर करने वाला, हृदय के लिए उपयोगी, रक्त के जमाव में उपयोगी होने के कारण पपीते का महत्व हमारे जीवन के लिए बहुत अधिक हो जाता है।

पपीते के सेवन से चेहरे पर झुर्रियां पड़ना, बालों का झड़ना, कब्ज, पेट के कीड़े, वीर्यक्षय, स्कर्वी रोग, बवासीर, चर्मरोग, उच्च रक्तचाप, अनियमित मासिक धर्म आदि अनेक बीमारियां दूर हो जाती है। पपीते में कैल्शियम, फास्फोरस, लौह तत्व, विटामिन- ए, बी, सी, डी प्रोटीन, कार्बोज, खनिज आदि अनेक तत्व एक साथ हो जाते हैं।

पपीते का बीमारी के अनुसार प्रयोग निम्नानुसार किया जा सकता है।

1) पपीते में ‘कारपेन या कार्पेइन’ नामक एक क्षारीय तत्व होता है जो रक्त चाप को नियंत्रित करता है। इसी कारण उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के रोगी को एक पपीता (कच्चा) नियमित रूप से खाते रहना चाहिए।

2) बवासीर एक अत्यंत ही कष्टदायक रोग है चाहे वह खूनी बवासीर हो या बादी (सूखा) बवासीर। बवासीर के रोगियों को प्रतिदिन एक पका पपीता खाते रहना चाहिए। बवासीर के मस्सों पर कच्चे पपीते के दूध को लगाते रहने से काफी फायदा होता है।

3) पपीता यकृत तथा लिवर को पुष्ट करके उसे बल प्रदान करता है। पीलिया रोग में जबकि यकृत अत्यन्त कमजोर हो जाता है, पपीते का सेवन बहुत लाभदायक होता है। पीलिया के रोगी को प्रतिदिन एक पका पपीता अवश्य खाना चाहिए। इससे तिल्ली को भी लाभ पहुंचाया है तथा पाचन शक्ति भी सुधरती है।

4) महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म एक आम शिकायत होती है। समय से पहले या समय के बाद मासिक आना, अधिक या कम स्राव का आना, दर्द के साथ मासिक का आना आदि से पीड़ित महिलाओं को ढाई सौ ग्राम पका पपीता प्रतिदिन कम से कम एक माह तक अवश्य ही सेवन करना चाहिए। इससे मासिक धर्म से संबंधित सभी परेशानियां दूर हो जाती है।

5) जिन प्रसूता को दूध कम बनता हो, उन्हें प्रतिदिन कच्चे पपीते का सेवन करना चाहिए। सब्जी के रूप में भी इसका सेवन किया जा सकता है।

6) सौंदर्य वृध्दि के लिए भी पपीते का इस्तेमाल किया जाता है। पपीते को चेहरे पर रगड़ने से चेहरे पर व्याप्त कील मुंहासे, कालिमा व मैल दूर हो जाते हैं तथा एक नया निखार आ जाता है। इसके लगाने से त्वचा कोमल व लावण्ययुक्त हो जाती है। इसके लिए हमेशा पके पपीते का ही प्रयोग करना चाहिए।

7) कब्ज सौ रोगों की जड़ है। अधिकांश लोगों को कब्ज होने की शिकायत होती है। ऐसे लोगों को चाहिए कि वे रात्रि भोजन के बाद पपीते का सेवन नियमित रूप से करते रहें। इससे सुबह दस्त साफ होता है तथा कब्ज दूर हो जाता है।

8) समय से पूर्व चेहरे पर झुर्रियां आना बुढ़ापे की निशानी है। अच्छे पके हुए पपीते के गूदे को उबटन की तरह चेहरे पर लगायें। आधा घंटा लगा रहने दें। जब वह सूख जाये तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें तथा मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें। ऐसा कम से कम एक माह तक नियमित करें।

9) नए जूते-चप्पल पहनने पर उसकी रगड़ लगने से पैरों में छाले हो जाते हैं। यदि इन पर कच्चे पपीते का रस लगाया जाए तो वे शीघ्र ठीक हो जाते हैं।

10) पपीता वीर्यवर्ध्दक भी है। जिन पुरुषों को वीर्य कम बनता है और वीर्य में शुक्राणु भी कम हों, उन्हें नियमित रूप से पपीते का सेवन करना चाहिए।

11) हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदायक होता है। अगर वे पपीते के पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित रूप से एक कप की मात्रा में रोज पीते हैं तो अतिशय लाभ होता है।

Information about human body

 Hello friends,
         Today's I'll be share with u some information about human body.    



       मानव शरीर में जानने योग्य बातें



 1. वस्यक व्यक्तियों में अस्थियों की संख्या : → 206

2. खोपड़ी में अस्थियां : → 28

3. कशेरुकाओ की संख्या: → 33

4. पसलियों की संख्या: → 24

5. गर्दन में कशेरुकाएं : → 7

6. श्वसन गति : → 16 बार प्रति मिनिट

7. हृदय गति : → 72 बार प्रति मिनिट

8. दंत सूत्र : → 2:1:2:3

9. रक्तदाव : → 120/80

10. शरीर का तापमान : → 37 डीग्री 98.4 फ़ारेनहाइट

11. लाल रक्त कणिकाओं की आयु : → 120 दिन

12. श्वेत रक्त कणिकाओ की आयु : → 1 से 3 दिन

13. चेहरे की अस्थियां: → 14

14. जत्रुक की संख्या :→ 2

15. हथेली की अस्थियां: → 14

16 पंजे की अस्थियां: → 5

17. ह्दय की दो धड़कनों के बीच का समय : → 0.8 से.

18. एक श्वास में खीची गई वायु : → 500 मि.मी.

19. सुनने की क्षमता : → 20 से १२० डेसीबल

20. कुल दांत : → 32

21. दूध के दांतों की संख्या : → 20

22. अक्ल दाढ निकलने की आयु : → 17 से 25 वर्ष

23. शरीर में अमीनों अम्ल की संख्या : → 22

24. शरीर में तत्वों की संखया : → 24

25. शरीर में रक्त की मात्रा : → 5 से 6 लीटर

(शरीर के भार का 7 प्रतिशत)

26. शरीर में पानी की मात्रा : → 70 प्रतिशत

27. रक्त का PH मान : → 7.4

28. ह्दय का भार : → 300 ग्राम

29. महिलाओं के ह्‌दय का भार → 250 ग्राम

30. रक्त संचारण में लगने वाला समय → 22 से.

31. छोटी आंत की लंबाई → 22 फीट

33. शरीर में पानी की मात्रा → 22 लीटर

34. मष्तिष्क का भार → 1380 ग्राम

35. महिलाओं के मष्तिष्क का भार → 1250 ग्राम

36. गुणसूत्रों की संख्या → 23 जोड़े

37. जीन्स की संख्या → 97 अरब

Benefits of ginger.

                 अदरक के अनोखे गुण

अदरक के अनोखे गुण Ginger हर तरह के इनफेक्शन में काम आती है अदरक के अनोखे गुण Ginger हर तरह के इनफेक्शन में काम आती है

अदरक विश्व औषधि के नाम से जानी जाती है। अदरक शक्ति और स्फूर्ति का भंडार माना जाता है। इसके उपयोग की जानकारी हो तो यह अनमोल है। अदरक के सूखने पर इसे सोंठ कहते हैं, ये दोनों ही रूप में हमारे लिये बलवर्धक है। यह जनाना तथा मर्दाना दोनों के लिये अत्याधिक उपयोगी है।अदरक के गुणों का वर्णन पुरातन चिकित्सा(आयुर्वेदिक चिकित्सा)पद्धति में बखूबी  किया गया है।

■ सर्दी, जुकाम, खांसी, कफ, दमा में अदरक फायदा करता है।

■ अदरक को जो किसी न किसी रूप में सेवन करता है वह हृदय रोग से दूर रहता है।डायबिटीस को कंट्रोल करती है अदरक।

■ अदरक, नींबू, सेंधा नमक मिलाकर खाने से, हमें कैंसर से बचाता है।

■ जुकाम से, नाक बंद हो जाये,टॉन्सिल, बहरापन तथा कान बहने जैसे रोगों में अदरक का सेवन करें। इसी प्रकार अदरक तमाम परेशानियां दूर करती है।

■ अरूचि- यदाकदा भोजन के प्रति अरूचि पैदा हो जाती तो अदरक का रस और  एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में तीन-चार बार चाटें।

■ उंघना- पूरी नींद लेने के बाद भी काम के दौरान उंघना नींद आना जैसी परेशानी सताये तो सोंठ के चूर्ण के (अदरक का सूखा रूप) एक चुटकी चाय के खौलते पानी में डाल द तथा सर्दी हो या मानसून में सुबह धूप में बैठकर धीरे-धीरे पिये जिससे आलस तथा नींद भाग जायेगी। ये उंघना, नींद शरीर में अम्लता के बढ़ जाने से होती है। यह हर समय नींद आना या उंघना एक बीमारी जैसी है। अदरक माँर्निंग सिकनेस दूर करती है चाय में डालकर पीने से।

■ शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिये - अदरक एक घरेलू औषधि है। सोंठ इसका सूखा रूप है। आजकल अदरक अधिक से अधिक बाजारू खाने पीने की चीजों में इस्तेमाल किया जाता है। अदरक में बहुतायत में पौष्टिक तत्व पाये जाते हैं जैसे प्रोटीन, खनिज, कार्बोहाइड्रेट, रेशा,। अदरक शरीर को चुस्त व स्वस्थ बनाता है। साथ-साथ स्मरण शक्ति बढ़ाता है। अधिक सर्दी के दिनों में शरीर को उष्मा (गर्मी)देता है,शक्ति बनकर रोगों का निवारण करता है। अदरक आंतो के लिये एक पाचक टॉनिक जैसा है। सोंठ को घी, गुड़ में मिलाकर खाने से नई चेतना व शक्ति मिलती है। वृद्धावस्था में अधिकतर लोगों की पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है तो सोंठ का कवाथ लाभकारी होता है। उबलते पानी में एक चम्मच अदरक का रस या सोंठ पावडर डालें कुछ देर उबलने दें अब स्वादानुसार नमक या शहद डाल कर चुस्की ले कर पियें।

■ हिचकी- ताजे अदरक का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसने से हिचकी जाती रहेगी।

■ मुंह में बदबू- अदरक का रस 1 चम्मच गर्म पानी में डालकर कुल्ला करें। मुंह की दुर्गंध जाती रहेगी।

■ लकवा तथा हाथ पैर सुन्न होना- उड़द की दाल पीसकर उसे घी में भूनें इसमें गुड़, सोंठ पीसकर मिला दें। लड्डू बनाये। इसे नित्य एक लड्डू का सेवन करें।
सोंठ पाउडर व उड़द की दाल उबालकर इसका पानी पीने से लकवा ठीक होता है। हाथ पैर सुन्न होने पर एक  गांठ लहसुन की तथा सोंठ पानी के साथ पीस लें जो अंग सुन्न हो रहा हो उस पर इसका लेप करें  तथा बासी मुंह दो कली लहसुन की व जरा सी सोंठ चबायें। यह प्रयोग कम से कम 10-12 दिन तक करें अवश्य आराम मिलेगा।

■ कान का दर्द – ठंडी हवा या कान में मैल जमने से या फिर फुंसी होने से कान में दर्द हो तो अदरक का रस कपड़े से छानकर, गुनगुना कर तीन-चार बूंद कान में डालें 3-4 बार। यदि कान में सांय-सांय कर रहा हो तो थोड़ा-थोड़ा सोंठ, गुड़, घी मिलकर खाने से ठीक हो जायेगा।

■ जोड़ों पर दर्द-अदरक को पीसकर जोड़ों पर लेप करें। दर्द ठीक होगा। 250 ग्राम तिल के तेल में 500 ग्राम अदरक का रस मिलाकर पकाऐं जब सिर्फ तेल रह जाये तो उसे ठंडा कर शीशी में भर लें फिर संधि शोध(जोड़ों के दर्द) पर लगाऐं मालिश करें आराम आयेगा।

                          सावधानी

गर्मी के दिनों में अदरक का प्रयोग अधिक  न करें। अगर जरूरी हो तो बहुत कम मात्रा में करें कारण इसकी तस्वीर गर्म होती है।
रक्त की उल्टी में अदरक का प्रयोग बिल्कुल न करें

Healthy tips for glowing skin

        चमकती हुई त्वचा के लिए हर्बल ब्यूटी टिप्स

                                अंगूर

चेहरे पर चमक लाने के लिए कुछ अंगूर लें तथा उन्हें अपने चेहरे पर रगड़ें। अथवा इन्हें मसलकर पैक के रूप में चेहरे पर लगायें।

    खीरे का रस, ग्लिसरीन और गुलाब जल

ककड़ी का रस, ग्लिसरीन और गुलाब जल का मिश्रण बहुत अधिक प्रभावकारी होता है। धूप में निकलने के पहले तथा धूप से आने के बाद इसे अपने चेहरे पर लगायें।

                      चंदन, हल्दी और दूध

चंदन का पाउडर, हल्दी और दूध को मिलाकर एक पेस्ट बनायें। इसे चेहरे पर लगायें और कुछ मिनिट के लिए छोड़ दें तथा प्राकृतिक चमक और ताजगी पायें।

                       
                       शहद और क्रीम

त्वचा को मुलायम और चमकदार बनाने के लिए विशेष रूप से ठंड के दिनों में शहद और क्रीम का मिश्रण बहुत प्रभावकारी होता है।

          ताज़ा दूध, नमक और नीबू का रस

ताज़ा दूध, चुटकी भर नमक और थोडा सा नीबू का रस लें। यह मिश्रण आपकी त्वचा को साफ़ करता है और रोम छिद्रों को खोलता है।

                             टमाटर का रस

टमाटर के रस में नीबू का रस मिलाकर लगाने से चेहरा नरम और चमकदार बना रहता है।

    हल्दी पाउडर, गेंहूँ का आटा और तिल का तेल

हल्दी, आटा और तिल के तेल को मिलाकर एक पेस्ट बनायें। चेहरे के अनचाहे बालों से छुटकारा पाने के लिए इसका उपयोग करें।

                 पत्तागोभी का रस और शहद

पत्तागोभी के रस में शहद मिलाकर लगाने से चेहरे पर आने वाले झुर्रियों से बचाव किया जा सकता है।

                            गाजर का रस

चेहरे का रस चेहरे पर लगाने से त्वचा पर प्राकृतिक चमक आती है।

                शहद और दालचीनी का पाउडर

3 भाग शहद और 1 भाग दालचीनी का पाउडर मिलकर पेस्ट बनायें। इसे मुंहासों पर लगायें तथा रात भर ऐसे ही छोड़ दें। यह मुंहासों पर बहुत अधिक प्रभावी देखा गया है तथा इससे दाग भी कम होते हैं।

             मूंगफली का तेल और नीबू का रस

मुंहासों और ब्लैकहैड्स से बचने के लिए मूंगफली के तेल में ताज़ा नीबू का रस मिलकर लगायें।

                         एलो वीरा जूस


प्रभावित स्थान पर एलोवीरा जूस लगाने से पिगमेंटेशन कम होता है तथा त्वचा भी हाईड्रेट होती है।

                            घी और ग्लिसरीन

घी और ग्लिसरीन का मिश्रण एक बहुत अच्छा घरेलू मॉस्चराइज़र है।



मुल्तानी मिट्टी, गुलाब की पंखुड़ियां, नीम, तुलसी और गुलाब जल:

मुल्तानी मिट्टी, गुलाब की पंखुड़ियां, नीम की पत्तियों का चूर्ण, तुलसी की पत्तियों का चूर्ण और थोडा सा गुलाब जल/नीबू का रस मिलाकर लगाने से त्वचा स्वस्थ और चमकदार बनती है।

                             खुबानी और दही


ऐप्रकाट और दही को मिलकर एक पेस्ट बनाये। इससे त्वचा विशिष्ट बनती है तथा एक ताज़ा लुक आता है। यदि आपकी त्वचा शुष्क है तो इसमें थोडा सा शहद मिलाएं।

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