Information about vitamin B-complex.

Hi..today's I'll share with u regarding vitamin B-complex.

परिचय-
विटामिन बी-काम्पलेक्स शरीर को जीवनी शक्ति देने के लिए अति आवश्यक होता है। इस विटामिन की कमी से शरीर अनेक रोगों का गढ़ बन जाता है। विटामिन-बी के कई विभागों की खोज की जा चुकी है। ये सभी विभाग मिलकर ही विटामिन बी-काम्पलेक्स कहलाते हैं। हालांकि सभी विभाग एक दूसरे के अभिन्न अंग हैं, लेकिन फिर भी सभी आपस में भिन्नता रखते हैं। विटामिन बी-काम्पलेक्स 120 सेंटीग्रेड तक की गर्मी सहन करने की क्षमता रखता है। उससे अधिक ताप यह सहन नहीं कर पाता और नष्ट हो जाता है। यह विटामिन पानी में घुलनशील है। इसका प्रमुख कार्य स्नायु को स्वस्थ रखना तथा भोजन के पाचन में सक्रिय योगदान देना होता है। भूख को बढ़ाकर यह शरीर को जीवनी शक्ति देता है। ये खाए-पिए हुए पदार्थों को अंग लगाने में सहायता प्रदान करता है। क्षार पदार्थों के संयोग से यह बिना किसी ताप के नष्ट हो जाता है, पर अम्ल के साथ उबाले जाने पर भी नष्ट नहीं होता।

विटामिन-`बी´ काम्पलेक्स की कमी से उत्पन्न होने वाले रोग-

हाथ पैरों की उंगलियों में सनसनाहट होना।
मस्तिष्क की स्नायु में सूजन व दोष होना।
पैर ठण्डे व गीले होना।
सिर के पिछले भाग में स्नायु दोष हो जाना ।
मांसपेशियों का कमजोर होना ।
हाथ-पैरों के जोड़ अकड़ना।
शरीर का वजन घट जाना।
नींद कम आना।
मूत्राशय मसाने में दोष आना ।
महामारी की खराबी होना ।
शरीर पर लाल-चकत्ते निकलना।
दिल कमजोर होना ।
शरीर में सूजन आना ।
सिर चकराना ।
नजर कम हो जाना।
पाचन क्रिया की खराबी होना ।
विटामिन बी-काम्पलेक्स के स्रोत खाद्य पदार्थ-

टमाटर
भूसी दार गेंहू का आटा
अण्डे की जर्दी
हरी पत्तियों के साग
बादाम
अखरोट
बिना पॉलिश किया चावल
पौधों के बीज
सुपारी
नारंगी
अंगूर
दूध
ताजे सेम
ताजे मटर
दाल
जिगर
वनस्पति शाक भाजी
आलू
मेवा
खमीर
मक्की
चना
नारियल
पिस्ता
ताजे फल
कमरकल्ला
दही
पालक
बन्दगोभी
मछली
अण्डे की सफेदी
माल्टा
चावल की भूसी
फलदार सब्जी
विटामिन बी-काम्पलेक्स के प्रमुख विभाग

1.विटामिन बी1  थाईमिन हाइड्राक्लोराइट

(नोट-इसे एन्यूरिन तथा बेरी-बेरी विटामिन भी कहा जाता है।)

2 विटामिन बी2 ( रिबोफ्लेबिन अथवा लैक्टोफ्लेबिन)
इसको विटामिन `जी´ भी कहा जाता है।

3 विटामिन बी3 (पैन्टोथेनिक एसिड)

4 विटामिन बी4 (एमाइनो एसिड)

5 विटामिन बी6 (पायरीडॉक्सीन)

6 विटामिन बी7

7 विटामिन बी12
8 फोलिक एसिड

9 यीस्ट (खमीर)

10 निकोटनिक एसिड

11 नियासिन

12 निकोटिनामाइड

13 पैरा-एमीनो बेन्जोइएक एसिड

14 विटामिन `ए´बायोटिन

15 एडेनिल्कि एसिड

16 कोलीन

Benefits of Pearl millet (bajra)

 Hello friends,
                    Today's I'll share with u some benefit for bajra for bone health.hope you like it.


         बाजरा खाइए, हड्डियों के रोग नहीं होंगे

■ बाजरे की रोटी का स्वाद जितना अच्छा है, उससे अधिक उसमें गुण भी हैं।

■ बाजरे की रोटी खाने वाले को हड्डियों में कैल्शियम की कमी से पैदा होने वाला रोग आस्टियोपोरोसिस और खून की कमी यानी एनीमिया नहीं होता।

■ बाजरा लीवर से संबंधित रोगों को भी कम करता है।

■ गेहूं और चावल के मुकाबले बाजरे में ऊर्जा कई गुना है।

■ बाजरे में भरपूर कैल्शियम होता है जो हड्डियों के लिए रामबाण औषधि है। उधर आयरन भी बाजरे में इतना अधिक होता है कि खून की कमी से होने वाले रोग नहीं हो सकते।

■ खासतौर पर गर्भवती महिलाओं ने कैल्शियम की गोलियां खाने के स्थान पर रोज बाजरे की दो रोटी खाना चाहिए।

■ गर्भवती महिलाओं को कैल्शियम और आयरन की जगह बाजरे की रोटी और खिचड़ी दी जाती थी। इससे उनके बच्चों को जन्म से लेकर पांच साल की उम्र तक कैल्शियम और आयरन की कमी से होने वाले रोग नहीं होते थे।

■ इतना ही नहीं बाजरे का सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव में असामान्य पीड़ा के मामले भी न के बराबर पाए गए।

■ डाक्टर तो बाजरे के गुणों से इतने प्रभावित है कि इसे अनाजों में वज्र की उपाधि देने में जुट गए हैं।

■ बाजरे का किसी भी रूप में सेवन लाभकारी है।

■ लीवर की सुरक्षा के लिए भी बाजरा खाना लाभकारी है।
■  उच्च रक्तचाप, हृदय की कमजोरी, अस्थमा से ग्रस्त लोगों तथा दूध पिलाने वाली माताओं में दूध की कमी के लिये यह टॉनिक का कार्य करता है।

■ यदि बाजरे का नियमित रूप से सेवन किया जाय तो यह कुपोषण, क्षरण सम्बन्धी रोग और असमय वृद्ध होने की प्रक्रियाओं को दूर करता है।

■ रागी की खपत से शरीर प्राकृतिक रूप से शान्त होता है। यह एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद न आने की बीमारियों में फायदेमन्द होता है। यह माइग्रेन के लिये भी लाभदायक है।

■  इसमें लेसिथिन और मिथियोनिन नामक अमीनो अम्ल होते हैं जो अतिरिक्त वसा को हटा कर कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करते हैं।

■ बाजरे में उपस्थित रसायन पाचन की प्रक्रिया को धीमा करते हैं। डायबिटीज़ में यह रक्त में शकर की मात्रा को नियन्त्रित करने में सहायक होता है।

Information about allergies.

               एलर्जी: कारण, लक्षण एवं उपचार

एलर्जी या अति संवेदनशीलता आज की लाइफ में बहुत तेजी से बढ़ती हुई सेहत की बड़ी परेशानी है कभी कभी एलर्जी गंभीर परेशानी का भी सबब बन जाती है जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अति संवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे  एलर्जी कहा जाता है और जिस पदार्थ के प्रति प्रतिकिर्या दर्शाई जाती है उसे एलर्जन कहा जाता है l

                         एलर्जी  के कारण


 एलर्जी किसी भी पदार्थ से ,मौसम के बदलाव से या आनुवंशिकता जन्य हो  सकती है एलर्जी के कारणों में धूल ,धुआं ,मिटटी पराग कण, पालतू या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से ,सौंदर्य प्रशाधनों से ,कीड़े बर्रे आदि के काटने से,खाद्य पदार्थों से एवं कुछ अंग्रेजी दवाओ के उपयोग से एलर्जी हो सकती है सामान्तया एलर्जी नाक ,आँख ,श्वसन  प्रणाली ,त्वचा  व खान पान से सम्बंधित होती है किन्तु कभी कभी पूरे शरीर में एक साथ भी हो सकती है जो की गंभीर हो सकती है l

                   स्थानानुसार  एलर्जी  के  लक्षण


● नाक    की  एलर्जी -नाक  में  खुजली होना ,छीकें आना ,नाक  बहना ,नाक  बंद होना  या  बार  बार जुकाम  होना आदि l

● आँख की एलर्जी -आखों में लालिमा ,पानी आना ,जलन होना ,खुजली आदि l

● श्वसन संस्थान की एलर्जी -इसमें खांसी ,साँस लेने में तकलीफ एवं अस्थमा जैसी गंभीर समस्या हो सकती  है l

● त्वचा की एलर्जी -त्वचा की एलर्जी काफी कॉमन है और बारिश का मौसम त्वचा की एलर्जी के लिए बहुत ज्यादा    मुफीद है त्वचा की एलर्जी में त्वचा पर खुजली होना ,दाने निकलना ,एक्जिमा ,पित्ती  उछलना आदि होता है l

● खान पान से एलर्जी -बहुत से लोगों को खाने पीने  की चीजों जैसे दूध ,अंडे ,मछली ,चॉकलेट  आदि से एलर्जी  होती  है l

● सम्पूर्ण शरीर की एलर्जी -कभी कभी कुछ लोगों में एलर्जी से गंभीर स्तिथि उत्पन्न हो जाती है और सारे शरीर में  एक साथ गंभीर लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं ऐसी स्तिथि में तुरंत हॉस्पिटल लेकर जाना चाहिए l
अंग्रेजी दवाओं से एलर्जी-कई अंग्रेजी दवाएं भी एलर्जी का सबब बन जाती हैं जैसे पेनिसिलिन का  इंजेक्शन जिसका रिएक्शन बहुत खतरनाक होता है और मौके पर ही मोत हो जाती है इसके अलावा  दर्द की गोलियां,सल्फा ड्रग्स एवं कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी सामान्य से गंभीर एलर्जी के लक्षण उत्पन्न  कर सकती हैं l

● मधु मक्खी ततैया आदि का काटना –इनसे भी कुछ लोगों में सिर्फ त्वचा की सूजन और दर्द की  परेशानी होती है जबकि कुछ लोगों को  इमर्जेन्सी में जाना पड़ जाता है l
                        एलर्जी  से  बचाव


एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए

■ य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन किन चीजों से एलर्जी है इसके लिए आप ध्यान  से अपने खान पान और रहन सहन को वाच करेंl

■ घर के आस पास गंदगी ना होने दें  l
घर में अधिक से  अधिक  खुली और ताजा हवा आने का मार्ग  प्रशस्त करें|

■ जिन खाद्य  पदार्थों  से एलर्जी है उन्हें न खाएं l

■ एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l

■ बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा  लगायें l

■ गद्दे, रजाई,तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय समय पर गरम पानी से धोते रहे l
रजाई ,गद्दे ,कम्बल आदि को समय समय पर धूप दिखाते रहे l

■ पालतू  जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें l

■ ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l

■ घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें समय समय पर साफ सफाई करते रहे l

■ धूल मिटटी से बचें ,यदि धूल मिटटी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करेंl

■ नाक की एलर्जी -जिन लोगों को नाक की एलर्जी बार बार होती है उन्हें सुबह भूखे पेट 1 चम्मच गिलोय और 2 चम्मच आंवले के रस में 1चम्मच शहद मिला कर कुछ समय तक लगातार लेना चाहिए इससे नाक की एलर्जी में आराम आता है

■ सर्दी में घर पर बनाया हुआ या किसी अच्छी कंपनी का च्यवनप्राश  खाना भी नासिका एवं साँस की   एलर्जी से बचने में सहायता करता है

■ आयुर्वेद की दवा सितोपलादि पाउडर एवं गिलोय पाउडर को 1-1 ग्राम की मात्रा   में सुबह शाम भूखे पेट शहद के साथ कुछ समय तक लगातार लेना भी नाक एवं श्वसन संस्थान की एलर्जी में बहुत आराम देता है

■ जिन्हे  बार बार त्वचा की एलर्जी होती है उन्हें मार्च अप्रेल के महीने में जब नीम के पेड़ पर कच्ची  कोंपलें आ रही हों उस समय 5-7 कोंपलें 2-3 कालीमिर्च के साथ अच्छी तरह चबा चबा कर 15-20 रोज तक खाना  त्वचा के रोगों से बचाता है, हल्दी से बनी आयुर्वेद की दवा हरिद्रा खंड भी त्वचा के एलर्जी जन्य रोगों में बहुत गुणकारी  है इसे किसी आयुर्वेद चिकित्सक की राय से सेवन कर सकते हैं l
       

   सभी एलर्जी जन्य रोगों में खान पान और रहन सहन का बहुत महत्व है इसलिए अपना खान पान और रहन सहन ठीक रखते हुए यदि ये उपाय अपनाएंगे  तो अवश्य एलर्जी से लड़ने में सक्षम होंगे और एलर्जी जन्य रोगों से बचे रहेंगे एलर्जी जन्य रोगों में अंग्रेजी दवाएं रोकथाम तो करती हैं लेकिन बीमारी को जड़ से ख़त्म नहीं करती है जबकि आयुर्वेद की दवाएं यदि नियम पूर्वक ली जाती है तो रोगों को जड़ से ख़त्म करने की ताकत रखती हैं l

Healthy tips from ayurveda

खाना खाने के तुरंत बाद पानी क्यों नहीं पीना चाहिए?

आयुर्वेद के मुताबिक खाने के बाद पानी पीना हानिकारक होता है। आयुर्वेद के अनुसार भोजन के बाद पानी पीना जहर के समान है। पानी तुरंत पीने से उसका असर पाचन क्रिया पर पड़ता है। हम जो भोजन करते है वह नाभि के बाये हिस्से में स्थित जठराग्नि में जाकर पचता है। जठरआग्नि एक घंटे तक खाना खाने के बाद प्रबल रहती है। आयुर्वेद के मुताबिक जठर की अग्नि से ही खाना पचता है। अगर हम तुरंत पानी पी लेते है तो खाना पचने में काफी दिक्कत होती है। इसलिए आयुर्वेद ने खाने और पानी पीने में यह अंतर रखा है।

पानी पीने से जठराग्नि समाप्त हो जाती है जो कि भोजन के पचने के बाद शरीर को मुख्य ऊर्जा और प्राण प्रदान करती है। इसलिए ऐसा करने से भोजन पचने के बजाय गल जाता है। ऐसा करने से ज्यादा मात्रा में गैस और एसिड बनता है और एक दुष्चक्र शुरू हो जाता है। महर्षि वाघभट्ट ने 103 रोगों का जिक्र किया है जो भोजन के तुरंत बाद पानी पीने से होते हैं।

खाना खाने के लगभग पौन घंटे या एक घंटे के बाद पानी पीना उचित होता है। इस दौरान जठरआग्नि अपना काम कर चुकी होती है। अगर हम पानी खाने के तुरंत बाद पी लेते है तो वह मंद पड़ जाती है जिससे खाना ठीक से नहीं पचता है। आयुर्वेद में सुबह के वक्त खूब पानी पीना, खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना सेहत के अचूक नुस्खों में से एक है जो दीर्घायु जीवन की आधारशिला रखते है।


चॉकलेट का आनंद लीजिए क्योंकि इसमें छिपे है गुण

इस बात से हर कोई अवगत है कि ज्यादा मात्रा में शर्करा का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, लेकिन अगर इसका सेवन संतुलित रूप में किया जाए, तो इसके कई फायदे हैं। एक नए शोध में यह बात सामने आई है।

शोध तो यह भी कहता है कि मीठा व्यंजन न सिर्फ प्रौढ़ावस्था आने की गति को धीमा करता है, बल्कि यह सुचारु रक्त संचार को सुनिश्चित करता है और आपको खुशमिजाज रखने में मदद करता है। मिरर डॉट को डॉट यूके के मुताबिक, चॉकलेट में कोकोआ होता है, जिसमें फ्लावानॉल नामक एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो रक्त संचार को सुचारु करने में सहायक है। चॉकलेट में जितनी ज्यादा मात्रा में कोकोआ होगा, आपकी सेहत के लिए वह उतना ही फायदेमंद होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, आप जितनी ज्यादा मात्रा में फ्लावानॉल से भरपूर कोकोआ का सेवन करेंगे आपकी मानसिक क्षमता में उतनी ही वृद्धि होगी। त्वचा की सिकुड़न से लड़ने वाले प्रोटीन कोकोआ से भरपूर चॉकलेट में भी पाए जाते हैं।

वैज्ञानिक पत्रिका न्यूट्रीशनल न्यूरोसाइंस के मुताबिक, चॉकलेट आपका मूड बेहतर रखता है और अवसाद के लक्षणों को कम करता है। उच्च कोकोआ युक्त चॉकलेट खाने से न केवल कोलेस्ट्रॉल कम होता है, बल्कि यह रक्तचाप को भी कम करने में सहायक है। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि एक चॉकलेट खाने से वजन बढ़ाने वाले भोजन की इच्छा में कमी होती है, जिससे आपका वजन नियंत्रित रहता है।

         

         काम के हैं ये हेल्थ टिप्स

■ अगर आपके बाल ड्राई हैं, तो हफ्ते में एक बार बालों पर गर्म तेल की मसाज व भाप दें। गर्म तेल बालों को ड्राई होने से रोकेगा और उन्हें मुलायम बनाएगा।

■ मेहंदी को कलर आने तक ही बालों पर लगाकर रखें और फिर तुरंत धो दें। मेहंदी जितनी देर बालों में लगी रहती है, उतनी देर बालों की नमी सोखती है।

■ ड्राई बालों पर ब्राशिंग स्कैल्प पर दबाकर करने से तैलीय ग्रंथियां सक्रिय होती है, जिससे बालों की ड्राईनेस कम होती है।

■ गाजर के जूस में शहद व नमक डालकर पीने से आंखों की कम हुई रोशनी लौट आती है।

■ किडनी स्टोन से दूर रहने के लिए नियमित तौर पर तरबूज ड्रिंक का सेवन करें।

■ चुकंदर में आयर्न की मात्रा अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से चेहरे पर ग्लो आता है।

■ दिल के रोगियों के लिए करेला ड्रिंक बेहद फायदेमंद है। यह ब्लड को स्वच्छ बनाए रखता है।



Migraine

Hello friends today I want to share with you information about migraine.

   क्या होता है माइग्रेन! कारण, लक्षण और उपाय

माइग्रेन, एक ऐसी बीमारी जिसके मरीज दुनियाभर में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। हमारे देश में भी इसकी तादाद बढ़ती जा रही है। सबसे बड़ा कारण है भागदौड़ की जिंदगी। जो तनाव से तो भरपूर है पर उससे मुक्त होने के लिए हम कोई उपाय नहीं करते। बस यही सारी वजहें धीरे-धीरे माइग्रेन के रुप में बदलने लगती हैं।

माना जाता है कि जैसे ही आप सामान्य स्थिति से एकदम तनाव भरे माहौल में पहुंचते हैं तो सबसे पहले आपका सिर दर्द बढ़ता है। ब्लडप्रेशर हाई होने लगता है और लगातार ऐसी स्थितियां आपके सामने बनने लगे तो समझिए आप माइग्रेन के शिकार हो रहे हैं।

<a href='http://www.snapdeal.com/product/eveready-16-inches-rf05-pedestal/622832948291?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Eveready 16 Inches RF05 Rechargeable Pedestal Fan White from Snapdeal</a>

सिरदर्द से हर किसी का वास्ता है। ये एक ऐसा रोग है जिसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार तो ऐसा लगता है जैसे बेवजह सिरदर्द के शिकार हो गए हों। सिरदर्द का एक गंभीर रूप जो बार-बार या लगातार होता है, उसे माइग्रेन कहते हैं। माइग्रेन को आम बोलचाल की भाषा में अधकपारी भी कहते हैं।

                      माइग्रेन के लक्षण

आम तौर पर इसका शिकार होने पर सिर के आधे हिस्से में दर्द रहता है। जबकि आधा दर्द से मुक्त होता है। जिस हिस्से में दर्द होता है, उसकी भयावह चुभन भरी पीड़ा से आदमी ऐसा त्रस्त होता है कि सिर क्या बाकी शरीर का होना भी भूल जाता है।

माइग्रेन मूल रूप से तो न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इसमें रह-रह कर सिर में एक तरफ बहुत ही चुभन भरा दर्द होता है। ये कुछ घंटों से लेकर तीन दिन तक बना रहता है। इसमें सिरदर्द के साथ-साथ गैस्टिक, जी मिचलाने, उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इसके अलावा फोटोफोबिया यानी रोशनी से परेशानी और फोनोफोबिया यानी शोर से मुश्किल भी आम बात है। माइग्रेन से परेशान एक तिहाई लोगों को इसकी जद में आने का एहसास पहले से ही हो जाता है। पर्याप्त नींद न लेना, भूखे पेट रहना और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना जैसे कुछ छोटे-छोटे कारणों से भी आपको माइग्रेन की शिकायत हो सकती है।

                      माइग्रेन के कारण

माइग्रेन के कारण कई हो सकते हैं। एक तरफ तो कुछ स्थितियां हैं और दूसरी तरफ कुछ रोग भी होते हैं।

ज्यादातर लोगों को भावनात्मक वजहों से माइग्रेन की दिक्कत होती है। इसीलिए जिन लोगों को हाई या लो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और तनाव जैसी समस्याएं होती हैं उनके माइग्रेन से ग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। कई बार तो केवल इन्हीं कारणों से माइग्रेन हो जाता है। इसके अलावा हैंगओवर, किसी तरह का संक्रमण और शरीर में विषैले तत्वों का जमाव भी इसकी वजह हो सकता है।

एलर्जी के कारण भी माइग्रेन हो सकता है और अलग-अलग लोगों में एलर्जी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें भी एलर्जी का कारण बन जाती हैं। कुछ लोगों को दूध और उससे बनी चीजें खाने से एलर्जी होती है तो कुछ के लिए साग-सब्जी एलर्जी का कारण हो सकती है। किसी को धूल से एलर्जी होती है तो किसी को धुएं से। इसलिए अगर आपको पता हो कि आपको किन चीजों से एलर्जी है तो उनसे बच कर रहें।

                     कैसे बचें माइग्रेन से...

अब आपको बताते हैं कि आखिर आप कैसे बचें माइग्रेन से। वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है। फिर भी थोड़ी सी सावधानी रखकर आप इस बीमारी को खुद से दूर रख सकते हैं।

ऐसा नहीं कि माइग्रेन लाइलाज बीमारी है। अगर आप माइग्रेन से परेशान हैं और आपको कुछ सूझ नहीं रहा है तो ध्यान रखें। थोड़ी सी सावधानी आपको माइग्रेन से मुक्ति दिला सकती है। इसके लिए सबसे जरूरी है खुद के लाइफ स्टाइल को बदलना। खानपान में बदलाव लाना।

                 माइग्रेन में क्या न खाएं

अगर आपको माइग्रेन है तो आप डिब्बाबंद पदार्थों और जंक फूड का सेवन एकदम न करें। इससे आपका माइग्रेन और खतरनाक होता जाएगा। चूंकि जंक फूड में मैदे की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इसे कम से कम खाएं। चूंकि इनमें ऐसे रासायनिक तत्व पाए जाते हैं जो माइग्रेन को बढ़ा सकते हैं।

ऐसे में सवाल ये है कि माइग्रेन में क्या खाएं।

                    माइग्रेन में क्या खाएं

अगर आपको माइग्रेन है तो नाश्ते में ताजा और सूखे फलों का खूब सेवन करें। लंच में उन चीजों का इस्तेमाल करें जिनमें प्रोटीन भरपूर हो। मसलन दूध, दही, पनीर, दालें, मांस और मछली आदि। डिनर में चोकरयुक्त रोटी, चावल या आलू जैसी स्टार्च वाली चीजों के साथ सलाद भी लें। ज्यादा मिर्च-मसाले वाली चीजों से परहेज करें।

                 माइग्रेन से छुटकारा

माइग्रेन की अचूक दवा है योग और ध्यान। अगर योग नहीं कर सकते हैं तो व्यायाम करें। इससे आपका तनाव कम होगा। और तनाव कम होने से आपका डिप्रेशन दूर होगा। लेकिन ध्यान रहे आप जिस जगह पर योग कर रहे हैं वो प्रकाश से चकाचौंध वाली, तेज धूप, तेज गंध वाली नहीं होना चाहिए। साथ ही साथ माइग्रेन वाले रोगियों को अच्छी नींद लेना चाहिए।

इसके अलावा आप जब भी ऐसा कोई दर्द महसूस करें तो अपने मन से कोई भी दर्दनिवारक गोली न लें। बल्कि किसी अच्छे न्यूरोलाजिस्ट को इस बारे में बताएँ और उनके बताए निर्देशों के अनुसार ही चलें।

Swine flu

स्वाइन फ्लू के लक्षण, बचाव के उपाय और इलाज

                         
                               शुरुआती लक्षण


- नाक का लगातार बहना, छींक आना, नाक जाम होना।
- मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना।
- सिर में भयानक दर्द।
- कफ और कोल्ड, लगातार खांसी आना।
- उनींदे रहना, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
- बुखार होना, दवा खाने के बाद भी बुखार का लगातार बढ़ना।
- गले में खराश होना और इसका लगातार बढ़ते जाना।


स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है और मौसमी फ्लू में भी यह वायरस सक्रिय होता है। 2009 में जो स्वाइन फ्लू हुआ था, उसके मुकाबले इस बार का स्वाइन फ्लू कम पावरफुल है, हालांकि उसके वायरस ने इस बार स्ट्रेन बदल लिया है यानी पिछली बार के वायरस से इस बार का वायरस अलग है।

                    कैसे फैलता है

जब आप खांसते या छींकते हैं तो हवा में या जमीन पर या जिस भी सतह पर थूक या मुंह और नाक से निकले द्रव कण गिरते हैं, वह वायरस की चपेट में आ जाता है। यह कण हवा के द्वारा या किसी के छूने से दूसरे व्यक्ति के शरीर में मुंह या नाक के जरिए प्रवेश कर जाते हैं। मसलन, दरवाजे, फोन, कीबोर्ड या रिमोट कंट्रोल के जरिए भी यह वायरस फैल सकते हैं, अगर इन चीजों का इस्तेमाल किसी संक्रमित व्यक्ति ने किया हो।


                        नॉर्मल फ्लू से कैसे अलग

सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के वायरस में एक फर्क होता है। स्वाइन फ्लू के वायरस में चिड़ियों, सूअरों और इंसानों में पाया जाने वाला जेनेटिक मटीरियल भी होता है। सामान्य फ्लू और स्वाइन फ्लू के लक्षण एक जैसे ही होते हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू में यह देखा जाता है कि जुकाम बहुत तेज होता है। नाक ज्यादा बहती है। पीसीआर टेस्ट के माध्यम से ही यह पता चलता है कि किसी को स्वाइन फ्लू है। स्वाइन फ्लू होने के पहले 48 घंटों के भीतर इलाज शुरू हो जाना चाहिए। पांच दिन का इलाज होता है, जिसमें मरीज को टेमीफ्लू दी जाती है।


                 कब तक रहता है वायरस

एच1एन1 वायरस स्टील, प्लास्टिक में 24 से 48 घंटे, कपड़े और पेपर में 8 से 12 घंटे, टिश्यू पेपर में 15 मिनट और हाथों में 30 मिनट तक एक्टिव रहते हैं। इन्हें खत्म करने के लिए डिटर्जेंट, एल्कॉहॉल, ब्लीच या साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं। किसी भी मरीज में बीमारी के लक्षण इन्फेक्शन के बाद 1 से 7 दिन में डिवेलप हो सकते हैं। लक्षण दिखने के 24 घंटे पहले और 8 दिन बाद तक किसी और में वायरस के ट्रांसमिशन का खतरा रहता है।

                                चिंता की बात

इस बीमारी से लड़ने के लिए सबसे जरूरी है दिमाग से डर को निकालना। ज्यादातर मामलों में वायरस के लक्षण कमजोर ही दिखते हैं। जिन लोगों को स्वाइन फ्लू हो भी जाता है, वे इलाज के जरिए सात दिन में ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को तो अस्पताल में एडमिट भी नहीं होना पड़ता और घर पर ही सामान्य बुखार की दवा और आराम से ठीक हो जाते हैं। कई बार तो यह ठीक भी हो जाता है और मरीज को पता भी नहीं चलता कि उसे स्वाइन फ्लू था। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट बताती है कि जिन लोगों का स्वाइन फ्लू टेस्ट पॉजिटिव आता है, उनमें से इलाज के दौरान मरने वालों की संफ्या केवल 0.4 फीसदी ही है। यानी एक हजार लोगों में चार लोग। इनमें भी ज्यादातर केस ऐसे होते हैं, जिनमें पेशंट पहले से ही हार्ट या किसी दूसरी बीमारी की गिरफ्त में होते हैं या फिर उन्हें बहुत देर से इलाज के लिए लाया गया होता है।

                    यह रहें सावधान

5 साल से कम उम्र के बच्चे, 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं। जिन लोगों को निम्न में से कोई बीमारी है, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए :
- फेफड़ों, किडनी या दिल की बीमारी
- मस्तिष्क संबंधी (न्यूरोलॉजिकल) बीमारी मसलन, पर्किंसन
- कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
- डायबीटीजं
- ऐसे लोग जिन्हें पिछले 3 साल में कभी भी अस्थमा की शिकायत रही हो या अभी भी हो। ऐसे लोगों को फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं का प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) शरीर में होने वाले हॉरमोन संबंधी बदलावों के कारण कमजोर होता है। खासतौर पर गर्भावस्था के तीसरे चरण यानी 27वें से 40वें सप्ताह के बीच उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है।


                अकसर पूछे जाने वाले सवाल

- अगर किसी को स्वाइन फ्लू है और मैं उसके संपर्क में आया हूं, तो क्या करूं?
सामान्य जिंदगी जीते रहें, जब तक फ्लू के लक्षण नजर नहीं आने लगते। अगर मरीज के संपर्क में आने के 7 दिनों के अंदर आपमें लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर से सलाह करें।
- अगर साथ में रहने वाले किसी शफ्स को स्वाइन फ्लू है, तो क्या मुझे ऑफिस जाना चाहिए?
हां, आप ऑफिस जा सकते हैं, मगर आपमें फ्लू का कोई लक्षण दिखता है, तो फौरन डॉक्टर को दिखाएं और मास्क का इस्तेमाल करें।
- स्वाइन फ्लू होने के कितने दिनों बाद मैं ऑफिस या स्कूल जा सकता हूं?
अस्पताल वयस्कों को स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर सामान्यत: 5 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखते हैं। बच्चों के मामले में 7 से 10 दिनों तक इंतजार करने को कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति को 7 से 10 दिन तक रेस्ट करना चाहिए, ताकि ठीक से रिकवरी हो सके। जब तक फ्लू के सारे लक्षण खत्म न हो जाएं, वर्कप्लेस से दूर रहना ही बेहतर है।
- क्या किसी को दो बार स्वाइन फ्लू हो सकता है?
जब भी शरीर में किसी वायरस की वजह से कोई बीमारी होती है, शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र उस वायरस के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेता है। जब तक स्वाइन फ्लू के वायरस में कोई ऐसा बदलाव नहीं आता, जो अभी तक नहीं देखा गया, किसी को दो बार स्वाइन फ्लू होने की आशंका नहीं रहती। लेकिन इस वक्त फैले वायरस का स्ट्रेन बदला हुआ है, जिसे हो सकता है शरीर का प्रतिरोधक तंत्र इसे न पहचानें। ऐसे में दोबारा बीमारी होने की आशंका हो सकती है।

                            आयुर्वेद

                         ऐसे करें बचाव


इनमें से एक समय में एक ही उपाय आजमाएं।

- 4-5 तुलसी के पत्ते, 5 ग्राम अदरक, चुटकी भर काली मिर्च पाउडर और इतनी ही हल्दी को एक कप पानी या चाय में उबालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
- गिलोय (अमृता) बेल की डंडी को पानी में उबाल या छानकर पिएं।
- गिलोय सत्व दो रत्ती यानी चौथाई ग्राम पौना गिलास पानी के साथ लें।
- 5-6 पत्ते तुलसी और काली मिर्च के 2-3 दाने पीसकर चाय में डालकर दिन में दो-तीन बार पिएं।
- आधा चम्मच हल्दी पौना गिलास दूध में उबालकर पिएं। आधा चम्मच हल्दी गरम पानी या शहद में मिलाकर भी लिया जा सकता है।
- आधा चम्मच आंवला पाउडर को आधा कप पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

            स्वाइन फ्लू होने पर क्या करें

यदि स्वाइन फ्लू हो ही जाए तो वैद्य की राय से इनमें से कोई एक उपाय करें:
- त्रिभुवन कीर्ति रस या गोदंती रस या संजीवनी वटी या भूमि आंवला लें। यह सभी एंटी-वायरल हैं।
- साधारण बुखार होने पर अग्निकुमार रस की दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।
- बिल्वादि टैब्लेट दो गोली दिन में तीन बार खाने के बाद लें।

होम्योपैथी

कैसे करें बचाव

फ्लू के शुरुआती लक्षण दिखने पर इन्फ्लुएंजाइनम-200 की चार-पांच बूंदें, आधी कटोरी पानी में डालकर सुबह-शाम पांच दिन तक लें। इस दवा को बच्चों समेत सभी लोग ले सकते हैं। मगर डॉक्टरों का कहना है कि फ्लू ज्यादा बढ़ने पर यह दवा पर्याप्त कारगर नहीं रहती, इसलिए डॉक्टरों से सलाह कर लें। जिन लोगों को आमतौर पर जल्दी-जल्दी जुकाम खांसी ज्यादा होता है, अगर वे स्वाइन फ्लू से बचना चाहते हैं तो सल्फर 200 लें। इससे इम्यूनिटी बढ़ेगी और स्वाइन फ्लू नहीं होगा।

स्वाइन फ्लू होने पर क्या है इलाज

1: बीमारी के शुरुआती दौर के लिए
जब खांसी-जुकाम व हल्का बुखार महसूस हो रहा हो तब इनमें से कोई एक दवा डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं:
एकोनाइट (Aconite 30), बेलेडोना (Belladona 30), ब्रायोनिया (Bryonia 30), हर्परसल्फर (Hepursuphur 30), रसटॉक्स (Rhus Tox 30), चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार।
2: अगर फ्लू के मरीज को उलटियां आ रही हों और डायरिया भी हो तो नक्स वोमिका (Nux Vomica 30), पल्सेटिला (Pulsatilla 30), इपिकॉक (Ipecac-30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन से चार बार ले सकते हैं।
3: जब मरीज को सांस की तकलीफ ज्यादा हो और फ्लू के दूसरे लक्षण भी बढ़ रहे हों तो इसे फ्लू की एडवांस्ड स्टेज कहते हैं। इसके लिए आर्सेनिक एल्बम (Arsenic Album 30) की चार-पांच बूंदें, दिन में तीन-चार बार लें। यह दवा अस्पताल में भर्ती व ऐलोपैथिक दवा ले रहे मरीज को भी दे सकते हैं।

                               योग

शरीर के प्रतिरक्षा और श्वसन तंत्र को मजबूत रखने में योग मददगार साबित होता है। अगर यहां बताए गए आसन किए जाएं, तो फ्लू से पहले से ही बचाव करने में मदद मिलती है। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले अभ्यास करें:
- कपालभाति, ताड़ासन, महावीरासन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, भुजंगासन, मंडूकासन, अनुलोम-विलोम और उज्जायी प्राणायाम तथा धीरे-धीरे भस्त्रिका प्राणायाम या दीर्घ श्वसन और ध्यान।
- व्याघ्रासन, यानासन व सुप्तवज्रासन। यह आसन लीवर को मजबूत करके शरीर में ताकत लाते हैं।

                         डाइट

- घर का ताजा बना खाना खाएं। पानी ज्यादा पिएं।
- ताजे फल, हरी सब्जियां खाएं।
- मौसमी, संतरा, आलूबुखारा, गोल्डन सेव, तरबूज और अनार अच्छे हैं।
- सभी तरह की दालें खाई जा सकती हैं।
- नींबू-पानी, सोडा व शर्बत, दूध, चाय, सभी फलों के जूस, मट्ठा व लस्सी भी ले सकते हैं।
- बासी खाना और काफी दिनों से फ्रिज में रखी चीजें न खाएं। बाहर के खाने से बचें।

                 मास्क की बात


न पहने मास्क

- मास्क पहनने की जरूरत सिर्फ उन्हें है, जिनमें फ्लू के लक्षण दिखाई दे रहे हों।
- फ्लू के मरीजों या संदिग्ध मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को ही मास्क पहनने की सलाह दी जाती है।
- भीड़ भरी जगहों मसलन, सिनेमा हॉल या बाजार जाने से पहले सावधानी के लिए मास्क पहन सकते हैं।
- मरीजों की देखभाल करने वाले डॉक्टर, नर्स और हॉस्पिटल में काम करने वाला दूसरा स्टाफ।
- एयरकंडीशंड ट्रेनों या बसों में सफर करने वाले लोगों को ऐहतियातन मास्क पहन लेना चाहिए।

               कितनी देर करता है काम

- स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सामान्य मास्क कारगर नहीं होता, लेकिन थ्री लेयर सर्जिकल मास्क को चार घंटे तक और एन-95 मास्क को आठ घंटे तक लगाकर रख सकते हैं।
- ट्रिपल लेयर सजिर्कल मास्क लगाने से वायरस से 70 से 80 पर्सेंट तक बचाव रहता है और एन-95 से 95 पर्सेंट तक बचाव संभव है।
- वायरस से बचाव में मास्क तभी कारगर होगा जब उसे सही ढंग से पहना जाए। जब भी मास्क पहनें, तब ऐसे बांधें कि मुंह और नाक पूरी तरह से ढक जाएं क्योंकि वायरस साइड से भी अटैक कर सकते हैं।
- एक मास्क चार से छह घंटे से ज्यादा देर तक न इस्तेमाल करें, क्योंकि खुद की सांस से भी मास्क खराब हो जाता है।

                        कैसा पहनें

- सिर्फ ट्रिपल लेयर और एन 95 मास्क ही वायरस से बचाव में कारगर हैं।
- सिंगल लेयर मास्क की 20 परतें लगाकर भी बचाव नहीं हो सकता।
- मास्क न मिले तो मलमल के साफ कपड़े की चार तहें बनाकर उसे नाक और मुंह पर बांधें। सस्ता व सुलभ साधन है। इसे धोकर दोबारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

                        ध्यान रखें कि

- जब तक आपके आस-पास कोई मरीज या संदिग्ध मरीज नहीं है, तब तक मास्क न लगाएं।
- अगर मास्क को सही तरीके से नष्ट न किया जाए या उसका इस्तेमाल एक से ज्यादा बार किया जाए तो स्वाइन फ्लू फैलने का खतरा और ज्यादा होता है।
- खांसी या जुकाम होने पर मास्क जरूर पहनें।
- मास्क को बहुत ज्यादा टाइट पहनने से यह थूक के कारण गीला हो सकता है।
- अगर यात्रा के दौरान लोग मास्क पहनना चाहें तो यह सुनिश्चित कर लें कि मास्क एकदम सूखा हो। अपने मास्क को बैग में रखें और अधिकतम चार बार यूज करने के बाद इसे बदल दें।

Tips for healthy & glowing skin

Hello friends,
          Today I'll be share with u easy tips for healthy and glowing skin.




                                       सुन्दर और चमकदार त्वचा के लिए ब्यूटी टिप्स



                                   मॉइस्चराइस करने के साथ करें रोज़ाना चेहरे सफाई



मॉइस्चराइज़ेशन के साथ साथ ही त्वचा की सेहत बरकरार रखने के लिए रोज़ाना टोनिंग और त्वचा की सफाई करें।चेहरे की ताज़गी और निखार हेतु पानी सबसे असरदार क्लींजिंग एजेंट है। ऊन से जैविक कॉटन बनाएं और उसे पानी से भिगोकर चेहरे पर लगाएं। इससे आपकी त्वचा को तुरंत निखार और ताज़गी मिलेगी और वह साफ़ दिखेगी। रोज़ाना दो बार चेहरा साफ़ करने से त्वचा की ब्रेक आउट की समस्या और काले धब्बे दूर होते हैं। तुलसी के पानी का टोनर के अतिरिक्त उपयोग करें और इसे जैविक कॉटन में मिलाकर चेहरे पर लगाएं। लाल प्याज का रस,मुल्तानी मिटटी और स्वीटी (छोटा कलाकंद)का मिश्रण बनाएं और इसका प्रयोग मॉइस्चराइज़र के तौर पर चेहरे पर प्रयोग करें। इससे त्वचा की खोई चमक वापस आएगी।

<a href='http://www.snapdeal.com/product/ala4u-beige-pure-georgette-embroidered/633570204329?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy ALA4U Beige Georgette Semi Stitched Dress Material from Snapdeal</a>\



                                                   नींबू के रस का प्रयोग



नींबू के रस को बादाम के तेल और बीच सोडियम के साथ मिलाएं। अब इसे हाथों से या जैविक कॉटन की मदद से त्वचा पर लगाएं। यह मिश्रण त्वचा से मृत कोशिकाओं को हटाता है और त्वचा को चमक प्रदान करता है। नींबू के छिलके त्वचा में हुए दाग धब्बे भी दूर करने में अहम भूमिका निभाते हैं।


 <a href='http://www.snapdeal.com/product/styles-closet-pink-georgette-designer/640543115669?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Styles Closet Pink Georgette Designer Pink Embroidered Anarkali Sem... from Snapdeal</a>


                                                        बेसन का प्रयोग




सनबर्न से बचने और त्वचा से टैन हटाने के लिए 1 चम्मच बेसन और 2 चम्मच दही का मिश्रण बनाएं और इसे चेहरे पर लगाएं। 30 मिनट तक इसे चेहरे पर सूखने दें और फिर ठन्डे पानी से चेहरा धो लें। इससे आपकी त्वचा प्राकृतिक रूप से साफ़ और स्वस्थ रहेगी। जिनकी त्वचा सूरज की किरणों के आगे ज़्यादा संवेदनशील है उनके चेहरे पर दही काफी अच्छा असर करती है।

               
<a href='http://www.snapdeal.com/product/veddeal-pink-georgette-anarkali-suit/676855703294?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Beautiful fancy PinkColor Embroidered Anarkali salwar suit from Snapdeal</a>




                                                         टमाटर का प्रयोग


टमाटर आमतौर पर काफी असरदार एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं तथा इसका प्रयोग झुर्रियों से मुक्त त्वचा पाने के लिए किया जाता है। 2 बड़े टमाटर मैश करके उसे चेहरे पर लगाएं और 20 मिनट के बाद ठन्डे पानी से धो दें। ज़्यादा बेहतर परिणामों केलिए मैश किये टमाटर में दही मिलाएं। इसे रोज़ सुबह चेहरे पर लगाने से त्वचा खूबसूरत और रौनक भरी हो जाती है।


<a href='http://www.snapdeal.com/product/prestige-ceramic-twin-pack-fry/639735617852?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Prestige Ceramic Twin Pack (Fry Pan- 200 mm and Omni Tawa- 250 mm ) from Snapdeal</a>


                                                                     खीरा


त्वचा को पोषण देने में खीरा भी एक अहम भूमिका निभाता है। चेहरे की चमक को बढ़ाने के लिए ताज़े दूध के साथ के साथ खीरे का प्रयोग करें।खीरे का यह रस त्वचा में समाने में 45 मिनट का समय लगेगा। इसके बाद इस रस को पानी से धो दें। निर्धारित समय से ज़्यादा इसे चेहरे पर ना रखें अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं।


                                                                      लहसुन



बाहरी त्वचा के लिए लहसुन काफी लाभदायक सिद्ध होते हैं क्योंकि इनमें त्वचा को ठंडा रखने तथा एस्ट्रिंजेंट के भी गुण होते हैं। इसमें एसिडिक तत्व भी होते हैं जो कि त्वचा को पोषण देते हैं।




<a href='http://www.snapdeal.com/product/wonderchef-oscar-bello-blue-cookware/657259770285?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Wonderchef Oscar Bello Blue Cookware Set from Snapdeal</a>

                                                          

                                                             खीरे और नींबू का मिश्रण


ब्लैकहैड हटाने और सुन्दर स्वस्थ पाने के लिए त्वचा पर एवं गले पर खीरे का और अन्य फलों का रस लगाएं।10 मिनट तक सूखने दें और उसके बाद त्वचा मेंआए निखार को स्वयं देखें।


     
 <a href='http://www.snapdeal.com/product/cello-plastic/665038396?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Cello Oscar Casseroles Set Exclusive (3 pcs.) Black from Snapdeal</a>




                                                         सूखी त्वचा के लिए फेस पैक


 अगर आपकी त्वचा सूखी है तो खरबूजे,कद्दू और खीरे का पेस्ट बनाएं। इसमें डेरी क्रीम मिलाकर अपने चेहरे पर लगाएं। अब को 1 घंटे तक सूखने दें और फिर सादे पानी से मुंह धो लें।



<a href='http://www.snapdeal.com/product/glory-multicolour-wrist-watches-set/639996285133?utm_source=aff_prog&utm_campaign=afts&offer_id=17&aff_id=82536' target=_blank>Buy Glory Multicolour Wrist Watches Set Of 10 from Snapdeal</a>


Information about Iron

  Google images लाल रक्त कोशिकाओं को खून में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए लोहे की आवश्यकता रहती है। फेफड़ों से शरीर की कोशिकाओं और ऊतकों तक ऑक्सी...