उक्त रक्तचाप के उपचार ( High B.p)


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रक्तचाप जिसे हाईपरटेंशन भी कहते हैं एक बहुत ही गंभीर और भयंकर रोग है क्योंकि अगर रोगी को सही समय पर सही चिकित्सीय मदद नहीं मिलती तो इससे हार्ट अटैक, ब्रेन हैंमरेज, वगैरह भी होने की संभावना रहती है। वह रोग है जिसमें हृदय के संकुचन की अवस्था में रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव पारे के 140 mm से ज्यादा या हृदय के विस्तारण की अवस्था में 90 mm से ज्यादा रहता है या दोनों अवस्थाओं में ज्यादा रहता है। इसकी वजह है शारीरिक गतिविधियों की कमी। मोटापा, तनाव, खाने पीने में लापरवाही, गंभीर बीमारियाँ, अनुवांशिक बीमारियाँ, धूम्रपान, नशा ।

●  मुख्य कारणों में से एक है आपके रक्त का गाढ़ा होना। रक्त गाढ़ा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। जिससे नसों और धमनियों पर दबाव पड़ता है। लहसुन में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेनट्स , जैसे कि सेलेनियम, विटामिन सी और एलीसीन होते है, जो कि रक्त को पतला करने में काफी प्रभावशाली होते हैं। इसीलिए सुबह सुबह कच्चे लहसुन के दो तीन कली के टुकड़े चबाने से या उसके महीन टुकड़े करके निगलने से काफी फायदा पहुँचता है।

● नमक का प्रयोग कम करना चाहिए।एक चम्मच आंवले का रस और एक ही चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में बहुत लाभ होता है।

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● पपीता भी बहुत लाभकारी है, इसे खाली पेट चबा-चबाकर खाना चाहिए ।

● तरबूज के बीज तथा खसखस को अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। प्रतिदिन खाली पेट एक चम्मच पानी के साथ लें।

● गाजर और पालक का रस मिलाकर एक गिलास सुबह-शाम पीने से लाभ मिलता है।

● जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीना चाहिए।

● जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास हल्के गर्म पानी में एक चम्मच काली मिर्च पाउडर घोलकर 2-2 घंटे में पीते रहें।


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● करेला और सहजन की फ़ली का नित्य सेवन हितकारी हैं।सौंफ़, जीरा, शक्‍कर तीनों को बराबर लेकर पाउडर बना लें। इसे एक चम्मच एक गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम पीने से लाभ होता है।

● पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं।

●  सुबह शाम एक टुकड़ा अदरक का काली मिर्च के साथ चूसना चाहिए ।

● लाल मिर्च के सेवन से नसें और रक्त वाहिकाएं चौड़ी हो जाती हैं,जिससे रक्त प्रवाह सहज हो जाता है और रक्तचाप नीचे आ जाता है।

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● बिना आटे से चोकर निकाले गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खानी चाहिए ।

● पाँच ग्राम मेथीदाना पाउडर द्रह दिनों तक सुबह-शाम पानी के साथ लें। इससे भी लाभ मिलता है।

● प्रतिदिन नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट जरूर चलें, इससे ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है।

पथरी के रामबाण घरेलू उपाय


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किडनी में स्टोन की समस्या आजकल आम हो चली है। इसकी बड़ी वजह खान-पान की गलत आदतें होती हैं। जब नमक एवं अन्य खनिज (जो हमारे मूत्र में होते हैं) वे एक दूसरे के संपर्क में आते है या अगर किसी कारण से पेशाब गाढा हो जाता है तो किडनी के अन्दर छोटे-छोटे पत्थर जैसी कठोर वस्तुएं बन जाती हैं जिन्हे गुर्दे की पथरी के रूप में जाना जाता है।

■ नारियल का पानी पीने से पथरी में फायदा होता है।प्रतिदिन पानी पीना चाहिए।

■ करेले में मैग्नीशियम और फॉस्फोरस नामक तत्व होते हैं, जो पथरी को बनने से रोकते हैं।

■ 15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।

■ अंगूर में एल्ब्यूमिन और सोडियम क्लोराइड बहुत ही कम मात्रा में होता हैं, इनमें पोटेशियम नमक और पानी भरपूर मात्रा में होते है इसलिए अंगूर प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में भी उत्कृष्ट रूप में कार्य करता है।

■ पका हुआ जामुन पथरी से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

■ आप आधा किलो बथुए के साग को उबाल कर छान लें। अब इस पानी में जरा सी काली मिर्च, जीरा और हल्का सा सेंधा नमक मिलाकर, दिन में चार बार पीने से शीघ्र ही फायदा होता है।

■ आंवला का चूर्ण मूली के साथ खाने से मूत्राशय की पथरी निकल जाती है।

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■ लगभग 70 ग्राम प्याज को पीसकर और उसका रस निकाल कर पियें। सुबह, शाम खाली पेट प्याज के रस का नियमित सेवन करने से पथरी छोटे-छोटे टुकडे होकर निकल जाती है।

■ जीरे और चीनी को समान मात्रा में पीसकर एक-एक चम्मच ठंडे पानी से रोज तीन बार लेने से लाभ होता है और पथरी निकल जाती है।

■ सहजन की सब्जी खाने से टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा।

■केला जरूर खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है। विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता भी है। विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्टोन के इलाज में काफी मददगार माना जाता है ।

■ मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और फिर पानी में मिलाकर इसका घोल बना लीजिए, इस घोल को पीजिए।ऐसा नियमित रूप से करें शीघ्र ही पथरी निकल जाएगी।

■ कम से कम एक महीना तुलसी के पतों के रस के साथ शहद लेने से बहुत लाभ मिलता है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को भी रोजाना चबाना चाहिए ।

■ जीरे को मिश्री की चासनी अथवा शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।

■ पत्थरी का दर्द होने पर 60 मिली लीटर नींबू के रस में उतनी ही मात्रा में आर्गेनिक जैतून का तेल मिला कर सेवन करने से जल्दी ही आराम मिलता है। नींबू का रस और जैतून का तेल पूरे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत अच्छा रहता है।

■ बेल पत्थर पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह काली मिर्च खाएं। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन ऐसे सात काली मिर्च तक पहुंचे।आठवें दिन से काली मिर्च की संख्या घटानी शुरू कर दें और फिर एक तक आ जाएं। दो सप्ताह के इस प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है। याद रखें एक बेल पत्थर दो से तीन दिन तक चलेगा।

ऑयली स्किन के लिए घरेलू उपाय


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ऑयली स्किन महिलाओं की बड़ी समस्‍या है। वक्‍त की कमी के चलते यह समस्‍या और ज्‍यादा बढ़ गई है। हमारे आहार में पोषण की कमी ने इस समस्‍या में इजाफा ही किया है। खुद को बचाने के लिए त्‍वचा अधिक मेहनत करती है और परिणामस्‍वरूप वह तेल का निर्माण करने लगती है
    इस स्किन वाले लोगों को चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती रहती है। शॉवर के फौरन बाद उनका चेहरा ऑयली और मैला लगने लगता है।और साथ ही इससे आपका मेकअप भी बहुत जल्‍दी पिघल जाता है। मैल और मिट्टी के जो कण त्‍वचा के साथ चिपक जाते हैं, वे आगे चलकर एक्‍ने और त्‍वचा संबंधी अन्‍य परेशानियों का कारण बनते हैं।
■ अपनी त्‍वचा को क्‍ली‍न करने का सबसे पहला नियम है कि आप उस पर जमा अतिरिक्‍त ऑयल निकालें। दिन में दो बार सुबह और शाम चेहरा धोने की आदत बनायें।लेकिन, अपने चेहरे को बार-बार धोने से बचें। ज्‍यादा बार धोने से कुदरती पोषण कम होता है।

■ भले ही आप मेकअप लगाने की आदी न हों, लेकिन इसे हटाना कभी न भूलें। सोने से पहले अच्‍छे से क्‍लींजर से मेकअप हटाये और चेहरा धोकर सोने जाएं। मेकअप रिमूविंग क्रीम और ऑयली फेस के लिए फेसवॉश इस्‍तेमाल करें। आपको ऐसा फेसवॉश इस्‍तेमाल करना चाहिए जिसमें से‍लिसिलिक एसिड हो।

■ चेहरा साफ करने के बाद उस पर एस्ट्रिंगजेंट लगाएं। याद रखें वह अल्‍कोहोलिक न हो। साथ ही दिन में एक बार से ज्‍यादा इसका इस्‍तेमाल न करें। ये उत्‍पाद त्‍वचा को रूखा कर सकते हैं। त्‍वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर दिन में दो बार एक्‍ने से लड़ने वाली क्रीम लगाइए।


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■ आपकी त्‍वचा के लिए माश्‍चराइजर बहुत जरूरी है। लेकिन,ऐसा चुनें जो आपकी त्‍वचा के लिए सही हो।    आपको ऐसा नहीं लगाना चाहिए जिसमें कोका बटर और मिनरल ऑयल हों। नॉन-कॉमेडोजेनिक आपके लिए सही रहेगा।
■ भले ही आसमान में बादल छा रहे हों, लेकिन आपको सनस्‍क्रीन लगाये बिना घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। आपका सनस्‍क्रीन कम से कम 15 एसपीएफ होना चाहिए।
■ सेब को काटकर उसे ब्‍लैंड कर लीजिए। इसमें थोड़ा शहद मिला लीजिए। इस मिश्रण को चेहरे पर 20 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दीजिए। इसके बाद गुनगुने पानी से धो लीजिए।
■ बादाम के तेल में कुछ बूंदें नींबू के रस की मिला लीजिए। इस मिश्रण को चेहरे पर लगा लीजिए। इस प्रयोग को एक महीने तक कीजिए। और इसके बाद आपको बहुत अच्‍छे नतीजे मिलेंगे।
■ पपीते को मैश कर लीजिए और इसे अच्‍छे से मिला लीजिए। इस मिश्रण से अपने चेहरे पर मसाज कीजिए और इसे 15-20 मिनट के लिए छोड़ दीजिए। इसके बाद इसे ठंडे पानी से धो लीजिए।

Types of vitamins

            विटामिन के प्रकार

कितने विटामिन हैं? हमारे शरीर की जरूरत है और प्रत्येक खेलने के लिए अपनी विशेष भूमिका है कि 13 विभिन्न विटामिन हैं.
पानी में घुलनशील घुलनशील या वसा - विटामिन दो प्रकार के हो सकते हैं. कुछ खाद्य पदार्थों में वसा में घुलनशील विटामिन होते हैं. हम इन खाद्य पदार्थ खाते हैं, शरीर में इन विटामिनों अवशोषित और फिर जिगर में या हमारे शरीर की वसा ऊतकों में उन्हें संग्रहीत करता है. दूसरों के रूप में लंबे समय से 6 महीने के रूप में के लिए रह सकते हैं, जबकि उनमें से कुछ, केवल कुछ दिनों के लिए वहाँ रहना. जरूरत पड़ने पर वे K रूप में शरीर द्वारा उपयोग किया जाता है. वसा में घुलनशील विटामिन विटामिन A, D, E और k हैं शरीर में पानी में घुलनशील विटामिन विटामिन सी और सभी बी विटामिन हैं.

               विटामिन A

विटामिन ए अच्छी दृष्टि के लिए बहुत आवश्यक है. इसकी प्रमुख समारोह प्रकाश और रंग भावना और देखने के लिए हमारी आंखों में मदद करता है जो रेटिना का उत्पादन होता है. यह भी विकास में मदद करता है और स्वस्थ त्वचा को बढ़ावा देता है. विटामिन ए की कमी के कारण रात का अंधापन पैदा कर सकता है. विटामिन ए दूध, जिगर, अंडे, मछली जिगर के तेल, पीले फल और सब्जियां (गाजर, cantaloupes, शकरकंद), और हरी पत्तेदार सब्जियों (पालक, collards, गोभी) में पाया जाता है.

               विटामिन B

यह विटामिन का एक बड़ा समूह है. वे हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद मिलेगी और यह भी हमारे शरीर में हमारे रक्त में ऑक्सीजन ले. वे शरीर की ऊर्जा का स्तर बढ़ाने में मदद क्योंकि इस तरह वे, हमारी चयापचय के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. विटामिन बी दिल, पाचन, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है. विटामिन बी की पर्याप्त मात्रा में अंडे, डेयरी उत्पाद, जिगर, अंडा, मीट, मछली, सेम, मटर, हरी पत्तेदार सब्जियों, और ऐसे में गेहूं और जई के रूप में साबुत अनाज में पाया जा सकता है.

             
                विटामिन C

विटामिन सी इसे प्रभावी ढंग से बैक्टीरिया और वायरस से बचाने के लिए अनुमति हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत. यह घाव और कटौती चंगा करने में मदद करता है, और स्वस्थ हमारे मसूड़ों और मांसपेशियों रहता है. यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और स्कर्वी से बचाता है. विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ है कि सभी खट्टे फल, cantaloupes, स्ट्रॉबेरी, टमाटर, आलू, फूलगोभी, हरी पत्तेदार सब्जियों और मिर्च हैं.

                विटामिन D

विटामिन डी हमारे दांत और हड्डियों को मजबूत और अधिक कैल्शियम को अवशोषित करने के लिए हमारे शरीर में मदद करता है. इस विटामिन से भरपूर खाद्य पदार्थ दूध, अंडे, मछली, कॉड लिवर तेल, जिगर और गढ़वाले अनाज कर रहे हैं.

                विटामिन E

विटामिन ई एंटी ऑक्सीडेंट गुणों में समृद्ध है और हमारे शरीर में विषाक्त पदार्थों को लड़ता है. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और लाल रक्त कोशिकाओं के रूप में मदद करता है. पागल, गेहूं के बीज, साबुत अनाज, सार्डिन, अंडे, स्प्राउट्स, ब्रोकोली और हरी पत्तेदार सब्जियां विटामिन ई से समृद्ध होती हैं

How to stay positive

                                          मन से नकारात्मकता हटाने के उपाय

सामाजिक जीवन में अपने आसपास के लोगों का बुरा व्यवहार अक्सर हमें दुखी और निराश करता है लेकिन इस तरह की स्थितियों को खुद पर हावी न होने दें बल्कि उनसे पूरी सकारात्मकता के साथ निपटें।
दफ्तर से लेकर आस-पड़ोस तक हम खुद को ऐसे लोगों और ऐसे व्यवहार के बीच पाते हैं जो हमारे भीतर असंतुलन और असहजता पैदा करता है। जो हमारे भीतर की शांति में खलल पैदा करता है।
दूसरों का कटुतापूर्ण व्यवहार हालांकि हमें बहुत तकलीफ पहुंचाता है लेकिन हम उनके तौर-तरीकों को बदल नहीं सकते। जिस तरह हम चाहते हैं उस तरह तो कतई नहीं। अपनी शांति के लिए नकारात्मकता से निपटने का तरीके खोजना ही आपके पास विकल्प हो सकता है। सकारात्मक होकर ही आप इस नकारात्मकता को जीत सकते हैं।-

                                               छींटाकशी से दूर की राह

अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां लोग नकारात्मक टिप्पणियों या छींटाकशी में रस ले रहे हों या फिर दूसरों का उपहास कर रहे हों तो ऐसी जगह और स्थिति से खुद को बाहर निकालना ही ठीक है। जैसे ही आपको भान हो कि इस तरह की बातचीत आपके स्वभाव से मेल नहीं खाती है तुरंत उन लोगों के बीच से निकल जाना चाहिए। अगर किसी कारण से आप ऐसी जगह से नहीं निकल पा रहे हैं तो भी इस तरह की बातचीत में हिस्सा लेने से बचें, प्रतिक्रिया व्यक्त करने से दूरी बनाएं।
 
                                               आलोचना से दूरी बनाएं

नकारात्मक टिप्पणियों, आलोचनात्मक दृष्टिकोण को व्यक्तिगत रूप से न लें। दूसरों की हताशा का असर खुद पर न पड़ने दें। दूसरों की हताशा और गुस्से पर अगर आप कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे तो उसका फायदा आपको अपने व्यक्तित्व में दिखाई देगा। अक्सर आप दूसरों के साथ उलझने पर अपने मन को खराब कर बैठते हैं। प्रयास के साथ इससे बचें।
 
                                                सकारात्मकता पर ध्यान दें

हर दिन अपने जीवन की तीन सकारात्मक बातों पर ध्यान दें। उन लोगों को याद करें जिन्होंने आपके दिन को अच्छा बनाया। उन लोगों को भूल जाएं जिनके साथ आपकी झड़प हुई हो। अपने दिन की बुरी घटनाओं के प्रभाव से अपनी शाम को खराब न होने दें। इस तरह आप अपने दिन को बेहतर तरीके से पूरा कर पाएंगे।

       
                                                 ज्यादा अपेक्षाओं से बचें

अपने मन मुताबिक दूसरों से काम की अपेक्षा रखना आपको निराश ही करेगा इसलिए लोगों से न्यूनतम अपेक्षाएं रखें। उन्हें बताएं भी नहीं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। जब आप उन्हें यह बताते हैं कि आपकी अपेक्षाएं क्या हैं और फिर भी चीजें ठीक नहीं होती तो आपको ज्यादा निराशा होती है और इसलिए सामाजिक जीवन में लोगों को ऐसे निर्देश देने से बचें। सामान्य तौर पर अगर आप उन्हें कोई बात समझा सकते हैं तो बस उतना ही प्रयास करें।
 
                                             प्रतिक्रियाओं पर गंभीर न हों

अक्सर आपके प्रयासों को लेकर लोग नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं और ऐसे में उन प्रतिक्रियाओं को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना बहुत जरूरी है। नकारात्मक प्रतिक्रियाओं को आपकी राह की बाधा न बनने दें। हमेशा ऐसे लोगों की बातों को भुलाने के लिए खुद को किसी सकारात्मक गतिविधि के साथ जोड़ें। बेहतर होगा कि ऐसे लोगों की बातों को अपने अनुरूप दिशा में मोड़ लें।
 
                                                   सफलता की खुशी

दिनभर में जो छोटी सफलताएं आपने प्राप्त की हैं उनका जश्न मनाएं। अपनी कमियों को लेकर बहुत ज्यादा सख्त नजरिया अपनाने से बचें। दूसरों के प्रति भी अधिक आलोचना भरा नजरिया न रखें और उनके छोटे-छोटे प्रयासों की सराहना करें। इस तरह आप उन्हें प्रेरित कर पाएंगे और खुद भी अच्छा महसूस करेंगे। इस तरह आप बेहतर टीम भी बना पाएंगे।

                                                    नकारात्मकता से बचें

जब भी कोई खराब स्थिति बनती है तो हमारे सामने दो विकल्प होते हैं कि हम उस पर प्रतिक्रिया दें या फिर चुप रहें। जो हो चुका है उस पर बात करके वातावरण को अधिक कटु बनाने के बजाय भविष्य के लिए बेहतर योजनाओं के बारे में सोचना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। निराशा के बजाय ऐसे समय सकारात्मक बातें करना टीम को प्रेरित करेगा।
 

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Information about yoga


                        योगासनों से परिचय´


योगशास्त्रों में योगासनों की संख्या का वर्णन करते हुए कहा गया है कि योगासन की संख्या इस संसार में मौजूद जीवों की संख्या के बराबर है। भगवान शिव द्वारा रचना किए गए आसनों की संख्या लगभग 84 लाख है। परंतु इन आसनों में से केवल महत्वपूर्ण 84 आसन ही सभी जानते हैं। हठयोग में केवल 84 आसनों को बताया गया है, जो मुख्य है तथा अन्य आसनों को इन्ही 84 आसनों के अन्तर्गत सम्माहित है। इन आसनों में 4 आसन मुख्य है-

■ समासन
■ पदमासन
■ सिद्धासन
■ स्तिकासन

बाकी अन्य दूसरे आसन व्यायामात्मक है। प्रत्येक आसन को अलग-अलग तरह से किया जाता है और इन आसनों के अभ्यास से अलग-अलग लाभ मिलते हैं। आसनों का प्रयोग केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षी भी करते हैं। इन आसनों के अभ्यास से सभी को लाभ मिलता है। उदाहरण के लिए- जब बिल्ली सोकर उठती है, तो सबसे पहले चारों पैरो पर खड़े होकर पेट के भाग को ऊंचा करके अपनी पीठ को खींचती है। इस प्रकार से बिल्लियों द्वारा की जाने वाली यह क्रिया एक प्रकार का आसन ही है। इस तरह से कुत्ता भी जब अपने अगले व पिछले पैरों को फैलाकर पूरे शरीर को खींचता है तो यह भी एक प्रकार का आसन ही है। इससे सुस्ती दूर होती है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है। इस तरह से सभी पशु-पक्षी किसी न किसी रूप में आसन को करके ही स्वस्थ रहते हैं। योगशास्त्रों के बारे में लिखने व पढ़ने वाले अधिकांश योगी पशु-पक्षी आदि से प्रेरित थे। क्योंकि आसनों में अधिकांश आसनों के नाम किसी न किसी पशु या पक्षी के नाम से रखा गए है, जैसे- शलभासन. सर्पासन, मत्स्यासन, मयूरासन, वक्रासन, वृश्चिकासन, हनुमानासन, गरूड़ासन, सिंहासन आदि।

योगासन योगाभ्यास की प्रथम सीढ़ी है। यह शारीरिक स्वास्थ्य को ठीक करते हैं तथा शरीर को शक्तिशाली बनाकर रोग को दूर करते हैं। इसलिए योगासन का अभ्यास है, जिससे शरीर पुष्ट तथा रोग रहता है। योगासनों का अभ्यास बच्चे, बूढ़े, स्त्री-पुरुष सभी कर सकते हैं।

योगासन का अभ्यास करने से पहले इसके बारे में बताएं गए आवश्यक निर्देश का ध्यानपूर्वक अध्ययन कर निर्देशों का पालन करें। षटकर्मों द्वारा शरीर की शुद्धि करने के बाद योगासन का अभ्यास करना विशेष लाभकारी है। यदि षटकर्म करना सम्भव न हो तो षटकर्म क्रिया के अभ्यास के बिना ही इन आसनों का अभ्यास करना लाभदायक है।

कुछ आसनों के साथ प्राणायाम, बन्ध, मुद्रा आदि क्रिया भी की जाती है। योगासनों के अभ्यास के प्रारंभ में उन आसनों का अभ्यास करना चाहिए, जो आसन आसानी से किये जा सकें। इन आसनों में सफलता प्राप्त करने के बाद ही कठिन आसन का अभ्यास करें। किसी भी योगासन को करना कठिन नहीं है। शुरू-शुरू में कठिन आसनों को करने में कठिनाई होती है, परंतु प्रतिदिन इसका अभ्यास करने से यह आसान हो जाता है।

                   योगासन से रोगों का उपचार

विभिन्न रोगों को दूर करने में `योग´ अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। प्राचीन काल से ही योग हमारी संस्कृति का महत्त्वपूर्ण अंग रहा है। `योग´ शब्द की उत्पत्ति युज धातु से हुई है, जिसका अर्थ जोड़ना, सम्मिलित होना तथा एक होना होता है। ´भगवत गीता´ के अनुसार `समत्व योग उच्यते´ अर्थात जीवन में समता धारण करना योग कहलाता है। योग कर्मसु कौशलम अर्थात कार्यो को कुशलता से सम्पादित करना ही योग है। महर्षि पतंजलि रचित योगसूत्र में सबसे पहले `अष्टांग योग´ की जानकारी मिलती है, जिसका अर्थ है आठ भागों वाला। इस योग के अनुसार `योगिश्चत्तवृत्ति निरोध´ अर्थात मन की चंचलता को रोकना योग माना जाता है।

                   रोगों में योगासन का उपयोग

अनेक प्रकार के रोग-विकार आज की जीवन की सामान्य स्थिति है। समय-असमय, जाने-अंजाने में न खाने योग्य पदार्थों का भी सेवन करना हमारी आदत बन गई है, जो शारीरिक स्वास्थ्य को खराब करने में अहम भूमिका निभाते हैं। आज के समय में इनसे छुटकारा पाने का एक ही उपाय हैं- योगासन। योगाभ्यास करने वाले व्यक्ति अपने आहार तथा खान-पान पर विशेष ध्यान देते हैं।

आयुर्वेद और योगासन दोनों के बीच घनिष्ठ सम्बंध है। आयुर्वेद में भोजन और परहेज का पालन करते हुए योगासन का अभ्यास करने से अनेक प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है। योगासन के निरंतर अभ्यास से पहले मनुष्य को शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है और शरीर में उत्पन्न रोगों को दूर करता है। योगासन से शरीर के मुख्य अंग स्वस्थ होते हैं, जैसे- पाचनतंत्र, स्नायुतंत्र, श्वासन तंत्र, रक्त को विभिन्न अंगो में पहुंचाने वाली तंत्र आदि प्रभावित होते हैं। योगासन के अभ्यास से शरीर के सभी अंग स्वस्थ होकर सुचारू ढंग से कार्यो को करने लगते हैं।

           योगासन द्वारा रोगों को दूर करना

योगशास्त्र में विभिन्न रोगों के विकारों को खत्म करने तथा स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए अनेक योगासनों को बताया गया है। जिन अंगों में कोई खराबी होती है, उस रोग से संबन्धित योगासन के निरंतर अभ्यास से रोग दूर हो जाते हैं। योगासनों द्वारा रोगो को खत्म कर शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। यदि योगासनो के अभ्यास के नियमो का पालन करें और खान-पान व परहेजों का पालन कर आसनों का अभ्यास का पालन करें तो विभिन्न प्रकार के रोग दूर होकर शारीरिक स्वास्थ्यता बनी रह सकती है।

Tips for wrinkles

           झुर्रियों से बचाव वा उसका उपचार



झुर्रियां अकसर बढ़ती उम्र में सभी में होती है। विशेषकर ज्यादा गर्मी या ज्यादा सर्दी के दौरान चेहरे पर झुर्रियां यानी बूढी रेखाओं के पड़ने की संभावना अधिक बढ़ जाती है.लेकिन आज की जीवनशैली में लगातार बदलाव होने के कारण अब असमय भी झुर्रियां होने लगी हैं।

आइए जानें झुरिर्यों से बचाव के घरेलू उपचार जो आपके लिए बहुत ही लाभदायक हो सकते हैं।

* अंडे के सफेद हिस्से से झुर्रियों वाले हिस्से पर मालिश करने से आप जल्दी ही इस परेशानी पर विजय प्राप्त कर लेंगे।

* गुलाबजल को फ्रीजर में जमाकर इसे नियमित रूप से झुर्रियों वाली जगह पर मलें। त्वचा टाइट रहेगी ।

* गुनगुने पानी से चेहरा अच्छी तरह धोएं फिर उसे खुरदरे तौलिए से रगड-रगड़ कर सुखा लें। आधा चम्मच दुध की ठंडी मलाई में नींबु के रस की चार पाँच बूंदें मिलाकर झुर्रियाँ तब तक मलते रहें जब तक कि मलाई घुलकर त्वचा में समा न जाए।आधा घण्टे बाद पानी से धो डालें परन्तु साबुन का प्रयोग न करें। एक माह तक नियमित इस प्रयोग से झुर्रियाँ दुर होती हैं

* खीरे के रस या फिर खीरे के छोटे-छोटे पीस काटकर झुर्रियों वाली जगह पर लगाकर उसकी मसाज करें।

* हल्दी या चंदन का लेप लगाने से भी झुर्रियों में लाभ मिलता हैं।

* जब झुर्रियां पडती हैं तो त्‍वचा पर गहरे रंग के धब्‍बे दिखाई देने लगते हैं। इसका मतलब कि मृत कोशिकाएं चेहरे को बूढा बना रहीं हैं। इसको दूर करने के लिए चेहरे पर स्‍क्रबिंग करनी चाहिए जिससे डेड सेल्‍स हट जाएं और नई त्‍वचा सामने आ जाए।

* पके हुए पपीते का एक टुकडा काटकर चेहरे पर घिसें या मसलकर चेहरे पर लगाएं। कुछ देर बाद धो लें। ऐसा लगातार करने से चेहरे की झुर्रियाँ दूर होती हैं,व चेहरे की रंगत भी निखरती है।

* त्वचा की झुर्रियाँ मिटाने के लिए आधा गिलास गाजर का रस नित्य खाली पेट कम से कम 15 दिन तक लें।

* चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने और युवा बनाये रखने के लिए अंकुरित चने व मूंग को सुबह शाम अवश्य ही खाएँ।

* सर्दियों में तेल से मसाज कर करके गरम पानी से नहाएं और नहाने के बाद क्रीम से भी मसाज करें। इससे त्‍वचा टाइट रहेगी और रुखी भी नहीं होगी।

* विटामिन सी और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार जैसे की मछली आदि में होते है उसका ज्यादा से ज्यादा सेवन करें इससे त्वचा जवाँ बनी रहती है।

* चेहरे पर कॉफी पाउडर का लेप लगाने से कॉफी पाउडर में मौजूद कैफीन की वजह से चेहरे की झुर्रियां बहुत तेजी से खत्म होती है ।

* झुर्रियों के सफल उपचार के लिए पानी पीना बहुत जरूरी है, दिन में कम से 14 -15 गिलास पानी चाहिए ।

* सुंदर,गोरी और टाइट त्वचा के लिए सप्ताह में 1-2 बार चंदन फेस पैक लगाना चाहिए । चंदन पाउडर का पैक चेहरे पर पड़े गहरे दाग धब्बे , झाइयां और झुर्रियों को जल्दी दूर करता है।

* हर रात को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें, इससे चेहरे के डार्क सर्किल और आंखें सूजी हुई नजर नहीं आएंगी। कभी भी तकिये में मुंह छिपा कर भी नहीं सोएं क्योंकि इससे भी चेहरे पर झुर्रियां पड़ जाती हैं।

* हमारी त्वचा पर तेज धूप का बहुत कुप्रभाव पड़ता है। इसलिए धूप में निकलने से पहले त्वचा पर ऐसा सनस्क्रीन, जिसमें जिंक ऑक्साइड हो जरूर लगाएं।

* एलोवेरा एवं शहद एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर हैं। त्वचा में नमी का स्तर बढ़ाने के लिए इन्हे प्रतिदिन आजमाएं इनसे भी झुर्रियां कम होंगी। * उम्र बढ़ने के साथ-साथ हमारे शरीर में कोलाजिन बनाना बंद हो जाता है, जिससे त्वचा में लचीलापन कम हो जाता है। इस बचने के लिए नमी वाला साबुन और क्रीम का रोज़ इस्तमाल करें। नित्य विटामिन सी युक्त क्रीम प्रयोग करें और ज्यादातर समय धूप से दूर रहें।

* अपनी त्वचा को झुर्रियों से बचाने के लिए हमें नियमित रूप से ताजे फलों जैसे आम, जामुन, संतरा, मौसम्मी, लीची, सेव, अंगूर, नाशपाती, पपीता, अनार और हरी सब्जियों पालक, बंदगोभी और दिन में कम से कम एक बार सलाद का सेवन करना चाहिए । इनमें ढेर सारे विटामिन्स एवं खनिज मसलन आयरन, विटामिन सी, विटामिन बी, फाइबर इत्यादि होते हैं । जो अत्यंत हीं लाभकारी होते हैं तथा हमारी त्वचा को जवान एवं खुबसूरत बनाये रखते हैं ।

* नियमित व्यायाम करना बहुत जरुरी है। व्यायाम करने से हमारी हर कोशिका को ओक्सिजन एवं रक्त प्राप्त होता है जिससे आपकी त्वचा जवान रहती है तथा झुर्रियां भी दूर रहती है ।

* पेट साफ रखने और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर कर भी आप चेहरे पर झुर्रियां पड़ने से रोक सकते हैं।

* तनाव से यथासंभव बचे । तनाव से हमारे शरीर में एक रसायन कोरटीसोल का स्राव होता है जो हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है जिससे झुर्रियां शीघ्र पड़ती है ।

* गुस्सा करने से बचे । गुस्सा करने अथवा तरह तरह से मुंह बनाने से भी चेहरे पर उम्र के पहले हीं झुर्रियां पड़ जाती हैं।

* सिगरेट और शराब दोनों की ही वजह से झुर्रियों बहुत तेजी से पड़ती है । स्मोकिंग से हमारे होठों का रंग काला पड़ जाता है और चेहरे की त्वचा का कोलाजिन भी नष्ट होता है, जिससे चेहरे पर तेजी से झुर्रियां पड़ने लगती हैं।

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